खामोशियों को पढ़ने का हुनर,
सबको नहीं आता।
रूठने वाले को मनाने का हुनर,
सबको नहीं आता।
पल भर के लिए आंखों में तो,
कोई भी बस जाता है।
दिल में बस जाने का हुनर,
सबको नहीं आता।
कुछ लोग शायरी की वजह बनकर आते हैं।
कुछ जाते हुए खुद शायरी बनकर जाते हैं।
कुछ लोग अपनी शख्सियत से दिल में घर कर जाते हैं।
कुछ अपनी फितरत से,दिल से उतर जाते हैं।
सोच-ओ-फितरत तो बदलकर देखो-2
हर नज़र में फिर आप नजर आते हैं।
रहना है तो लोगों के दिलों में रहो। ईंट पत्थर के मकां में रहना भी कोई रहना है? बसना है तो लोगों की आँखों में बसो,सपनों के शीशमहल में बसना भी कोई बसना है?हँसना हैं तो रोते को हँसाने के लिए हँसो,औरों की बेबसी पर हँसना भी कोई हँसना?Date : 9.03.2023..........Surendra Kumar..........