JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

बुधवार, 15 नवंबर 2023

खामोशियों को पढ़ने का हुनर,

सबको नहीं आता।

रूठने वाले को मनाने का हुनर,

सबको नहीं आता।

पल भर के लिए आंखों में तो,

कोई भी बस जाता है।

दिल में बस जाने का हुनर,

सबको नहीं आता।

शुक्रवार, 26 मई 2023

वजूद

आपका वजूद ही, आपकी पहचान है।
इस वजूद से ही दुनिया में तेरा नाम है।
अगर वजूद ही नही,फिर क्या रह जाएगा?
खोकर वजूद ज़माने भर की ठोकरें खाएगा।
यहाँ जिसे भी देखो,
अपने वजूद के लिए ही तो लड़ रहा है।
गर खुद से न हो सका तो,
दूसरों के सपनों को भी रौंदकर,
आगे बढ़ रहा है।
खुद से दुनिया को बदलने की हिम्मत रखिए।
जो ख़ुद ही बदल जाए, वो वजूद ही क्या है!

गुरुवार, 25 मई 2023

सफर

सफ़र खत्म होते ही,
हमसफर भी दूर जायेंगे।
हर कदम साथ चलने वाले ,
फिर,जाने कहाँ खो जाएंगे।
दिल के किसी कोने में बस,
कुछ यादें,कुछ बातें,कुछ पल 
बाकी रह जाएंगे।
अभी बाकी हैं जो पल,
उनको जी लो जी भरके,
फिर मिले या न मिलें,
दिल में बसाने वाले।

गुरुवार, 18 मई 2023

अच्छा नहीं होता

जलते चराग को बुझाना अच्छा नहीं होता।
रौशनी की चाह मे किसी घर को जलाना,
अच्छा नहीं होता।
खुशी न दे सको किसी को,कोई बात नहीं।
किसी के आंसुओं पे मुस्कुराना,
अच्छा नहीं होता।

बुधवार, 17 मई 2023

मां की ममता

माँ सलाम,  तेरी मीठी मीठी लोरी को।
माँ सलाम,  तेरी उंगली से बंधी,प्रेम की अटूट डोरी को।
माँ सलाम, तेरे सजल नैनों को।
अपने खून सींचा है तूने तन मेरा,
माँ  सलाम, तेरे उन नौ महीनों को।
माँ  सलाम मेरे इंतजार में बेचैन,
तेरी उन आंखों को।
सिर मेरा अपनी गोदी में रख,
अपलक जागकर बिताई उन रातों को।
तेरी ममता का मोल कोई हो नहीं सकता।
ज़रा सी खरोच भी कलेजे के टुकड़ों को आ जाए तो,
मन तेरा चैन से सो नहीं नहीं सकता।
रिश्ते हजारों मिल जाए इस दुनिया मगर,
माँ तेरे जैसा कोई,
हो नहीं सकता।
हो नहीं सकता!
हो नहीं सकता!

मंगलवार, 16 मई 2023

रूठने का मज़ा

छोड़िए, रखा क्या है!
दुनिया को समझने और समझाने में!
बस खुलकर मुस्कुराइए,
पैसे नहीं लगते मुस्कुराने में।
बहुत नाजुक होते हैं,रिश्ते, संभालकर रखिए।
वक्त नहीं लगता टूट जाने में।
रूठना , मनाना तो खुशनुमा ज़िंदगी का हिस्सा है,
कोई मजा लेता है मनाने का, 
किसी को आता है मज़ा रूठ जाने में।

शुक्रवार, 12 मई 2023

रोने वाले को थोड़ा हंसा दीजिए

गिरने वाले को बढ़कर, उठा लीजिए।
रोने वाले को थोड़ा हँसा दीजिए।
मुश्किलें राह की न कभी होंगीं कम।
इन राहों को अपना बना लीजिए।
हौंसला कोई देगा, हँसेगा कोई।
हँसने वालों को हँसकर भुला दीजिए।
हमको समझे जो, बांटे हमारे जो ग़म।
उसको आँखो में अपनी बसा लीजिए।
चाहे आंसू मिले,या मिले हर खुशी।
दिल से अपने सभी को दुआ दीजिए

रविवार, 7 मई 2023

औरों के नाम करता हूं

ज़िंदगी का हर पल औरों के नाम करता हूं।
अपने लिए नहीं, दूसरों की खुशियों के लिए,
हर काम करता हूं।
कौन,क्या समझता हैं ,इसकी फिक्र नहीं मुझे।
मैं तो अपना  हर दिन, सिर्फ इंसानियत के नाम करता हूं।
धन,दौलत या शोहरत की चाह नहीं मुझको।
जो अब तक मिला है ख़ुदा से मुझको,
मैं उसे भी औरों के नाम करता हूं।
जो साथ हैं मेरे और नहीं भी।
मैं सबको सलाम करता हूं।
चाहे हबीब हो या रकीब,खुश रहे हर कोई।
मैं दुआ यहीं ख़ुदा से सुबह शाम करता हूं।
सुबह शाम करता हूं।
सुबह शाम करता हूं।

मैंने कुछ नहीं माँगा, बिन माँगे ही मुझको,बहुत कुछ मिल गया।जहां उम्मीद नहीं थी,महज़ एक गुल की,वहां गुलिस्तां सारा मिल गया।जी रहा था खुद में, दूर अपनों से होकर।जब से छोड़ा है खुद को,तबसे अपनों से मैं जैसे मिल गया।

लोगों की खातिर अपनी खुशियाँ लुटा दीजिए।बेशक आँखो में आंसू हो आपकी,मगर जितना हो सके,लोगों को बस खुशियाँ ही खुशियाँ दीजिए।हों ज़िंदगी मे आपकी, चाहे जितने भी वीराने,जिदंगी औरो की, ए दोस्त!, गुलिस्तां बना दीजिए

शुक्रवार, 5 मई 2023

हर शख्स हो हम सा , ये ज़रूरी तो नहीं,इसी उम्मीद में हर शख़्स तन्हा रह गया। इजाज़त महज़ कुछ लोगों को ही थी, मगर हर कोई हमसे, जाने क्या-क्या कह गया। पूछा गुलों से हमने,,तुम्हे कांटों से डर नहीं लगता? मेरे सवाल पर हर गुल,सिर्फ हँसकर रह गया। धार तो बहुत तेज़ होती है, ज़िंदगी के दरिया की। जो हँसा वही रह गया, और जो रोया, यूं ही बह गया।

हम सिर्फ कहने में नहीं,करने में विश्वास रखते हैं।घोर अंधेरों के बीच भी उजालों की आस रखते हैं।सबकी राहों से कांटों को चुनकर हम।राहों को भी गुलों से भरने में विश्वास रखते हैं।आज नहीं तो कल होगी,सुबह ज़रूर होगी।अंधेरों से डरकर बैठने वाले नहीं हम,सूरज को बादलों से निकालने,का जारी प्रयास रखते हैं।

सोमवार, 1 मई 2023

चार दिन ही तो मिले हैं जिंदगानी के,
 इन्हे नफरतों में यूं तो न ज़ाया कीजै।
 भूल जाओगे अपना हर ग़म,
 कभी 'ख़ुद' से भी बाहर आया कीजै।
 याद रखती उन्हीं को दुनिया है, 
 जो जलके रोशनी लुटाते हैं।
चराग बन न सको गर तो कोई बात नहीं,
जो जल रहा है उसे तो न बुझाया कीजै।

रविवार, 30 अप्रैल 2023

कहने वालों की कौन सुनता है?
करने वालों की सुनो तो कोई बात बने।
हँसने वालों की कौन सुनता है?
हँसाने वालों की सुनो,तो कोई बात बने।
चुभने वालों की कौन सुनता है?
लफ्ज़ मरहम की तरह हों,तो कोई बात बनें।
अपनी- अपनी ही कहने वालों की कौन सुनता है?
दर्द औरों का भी सुनो, तो कोई बात बनें।
दौलत ओ शोहरत पे मरने वालों,की कौन सुनता है?
गुमां को छोड़कर जियो तो कोई बात बनें।

बुधवार, 26 अप्रैल 2023

खुद को तलाशते रहे दुनिया में,और तलाश खुद ही पर खत्म हुई।ज़िंदगी भर तरसते रहे,जिंदगी के लिए।अब मिली है तो,लगभग खत्म हुई।खरीदने निकले थे, दौलत से हर खुशी।ज़रा सी खुशी भी हासिल न कर सके, सारी दौलत से,मगर इस तलाश में,खुशियाँ भी, दौलत भी, और ज़िंदगी भी ख़त्म हुईं।

ऐसा नहीं कि, पहली बार हो रहा है।कि तू भी मुश्किलों का शिकार हो रहा है।ज़िंदगी का तो मुश्किलों से, रिश्ता बहुत पुराना है। सिर्फ तू ही नहीं , मुश्किलों से दो चार हो रहा है। जो मिला वो ख़ुदा की रहमत है, जो नहीं, वो तेरा मुकद्दर है। जो है नहीं क्यों उसका, इंतजार हो रहा है।

शनिवार, 22 अप्रैल 2023

सिर्फ़ कह देने से कोई दोस्त नहीं हो जाता।दोस्ती हर हाल में साथ निभाने का नाम है।ज़रूरी नहीं कि आसमां से सितारे ही तोड़े जाएं।आसमां की बुलंदियों का रास्ता दिखाना भी तो,एक दोस्त का ही काम है।बड़ी किस्मत से मिलते हैं,दोस्त फरिश्तों से।ऐसे दोस्तों से ही जिंदा, आज दोस्ती का नाम है।

क्या माँगू मैं अपने लिए ख़ुदा से,बिन माँगे ही उसने बहुत कुछ दे दिया है।शायद किस्मत में भी नहीं था उतना,जितना उसने दामन मेरा भर दिया है।

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2023

नहीं चाहता कि बदले में मुझे कुछ मिले।
बस थोड़ी सी कोशिश है मेरी,
हर चेहरा फूल सा खिले।
यही दुआ है हमेशा ऊपर वाले से,
कभी किसी से भी न हों, शिकवे या गिले।
दामन इतना तो भरना मेरा भी ए ख़ुदा!,
औरों के कुछ तो काम आए,
 जो भी सौगात ज़िंदगी में तुझसे मिले।

मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

Khushi Vo hai jo

खुशी वो है जो,
दूसरों की मुस्कुराहट से मिलती है।
क्यों खोजते हो बाहर?,
खुशी की कली तो,
मन के किसी कोने में ही खिलती है।
रखा  क्या है सिर्फ़ अपने लिए जीने में?
खुशियों की बारिश शुरू हो जाती है,
जब यह सोच बदलती है।

कुछ पाने की उम्मीद नहीं,कुछ खोने का ग़म नहीं।जो दिया अभी तक ऊपर वाले ने,वो इतना भी कम तो नहीं?

सोमवार, 17 अप्रैल 2023

ज़िंदगी में कभी दिन, होती कभी रात है।
 जिंदगी का हर पल, ख़ुदा की सौगात है।
 चेहरे पर हर हाल में खुशी कायम रखिए।
 नहीं समझेगा कोई, जो तेरे दिल में जज़्बात हैं।

रविवार, 16 अप्रैल 2023

हमने देखा है वो मंजर

हमने देखा है, वो मंज़र।
जब अपनों के ही हाथ में था,खंजर।
सभी अपने, बेगानों में शामिल होते रहे।
अपनों के इंतज़ार में हम,अपनों को ही खोते रहे।
दरख़्त से पत्ते क्या उड़े,
पंछियों ने भी आशियाना छोड़ दिया।
वक्त बदलते ही,वक्त ने,
ज़िंदगी का रुख मोड़ दिया।
कांटों पे चलते रहे,
मखमली राहों की उम्मीद न थी।
ग़मों में इतने खो गए कि,  
होठों पे हँसी की उम्मीद न थी।
फिर ख़ुदा की रहमत ने, 
अंधेरों में रौशनी भर दी।
खुशियों से भर दिया दामन,
 और ग़मों में कमी कर दी।
मगर हमने कभी गुमां न किया,
रौशनी भी औरों के नाम कर दी....
रौशनी भी औरों के नाम कर दी....
रौशनी भी औरों के नाम कर दी

मंगलवार, 11 अप्रैल 2023

क्या जिंदगी है तेरी?
अगर, तेरे जाने के बाद किसी की आँखों में नमी तक न हो?
तूने क्या कमाया?
अगर , तेरे जाने बाद, तेरे लिए दो ग़ज़ ज़मीं तक न हो।
क्या फायदा ?
हजारों नौकर- चाकर,गाड़ी , बंगले और रिश्तों का?
अगर, तेरी सांस उखड़ते वक्त,तेरी आह किसी ने सुनी तक न हो।
गुजारों अपनी ज़िंदगी ऐसे,
कि दुनिया से रुखसत के वक्त,
नम हों बेशुमार आँखें,
लोग इतने तेरे साथ चलें,
कि पांव रखने की ज़मीं तक न हो।


चलो अब से बिना मतलब जिया जाए।अपने लिए बहुत किया,अब कुछ औरों के लिए किया जाए।जल-जल के राख बहुत हो लिए,लोगों की खुशियों से।अब चरागों सा जलकर, दूसरों के अंधेरों को रौशन किया जाए।

बिना मतलब जीने का,मतलब ही कुछ और होता है।किसी की राह के कांटे चुन लेने का, मतलब ही कुछ और होता है।यूं तो लोगों को, दूसरों के ग़म पे हँसने की आदत है।ख़ुद अपनी कमियों पे हँसने का,मतलब ही कुछ और होता है।

नज़रों की इनायत से,कमियाँ नहीं छुपती।
वक्त पहचानो,दुनिया के साथ चलो,
ये दुनिया किसी के लिए नहीं रुकती।
ख़ुद में हौंसला, इल्म और तजुर्बा कायम रखो।
खुशामद से मिली तरक्की, ज्यादा देर तक नहीं टिकती।

सोचा था नहीं जाऊंगा,

सोचा था नहीं जाऊंगा,
मगर जाना पड़ा।
जो हो गया था उसको,
भुलाना पड़ा।
वो चल रहा था साथ,
मगर दिल से दूर था।
दिल के करीब,
फिर से उसे लाना पड़ा।
उसकी ख़ामोशी नस्तर सी चुभ रही थी।
शायद वो कुछ बोले,मुझे पुकारना पड़ा।
उसकी आँखों से आंसू सा बह रहा था मैं।
कहीं ख़त्म न हो जाऊं मैं,
उसे चुप कराना पड़ा।

रविवार, 9 अप्रैल 2023

पत्ते दरख़्त पर नहीं टिकते सूख जाने के बाद।
रिश्ते बहुत मुश्किल से जुड़ते हैं,टूट जाने के बाद।
ज़िंदगी बिना सपनों के कट सकती है,
बिना अपनों के नहीं।
साथ अपनों का नहीं मिलता,
 छूट जाने के बाद।

शनिवार, 8 अप्रैल 2023

कोई आएगा, इस इंतजार में क्यों बैठे हो?
कोई चाहेगा,बेकरार से क्यों बैठे हो?
इतना आसां नहीं,आँखों में किसी की बसना।
क्यों सरे राह यूं आँखेँ बिछाए बैठे हो?
हुस्न वाले हवा से होते हैं।
क्यों उनके सामने दीपक जलाए बैठे हो?
ये आसमां ही आफताब का ठिकाना है।
ज़मीं पे ये कभी तो उतरेगा,
इस इंतजार में क्यों बैठे हो?

बहुत रुलाया है दुनिया ने, कोई बात नही।चलो, सब भूलकर, दुनिया को हँसाया जाए।तोड़ने वालों ने तोड़ा है, कोई बात नही।चलो अब आशियां को फिर से बनाया जाए।चराग बुझ गया हवा से कोई बात नही।हर इक चराग को अब फिर से जलाया जाए।लफ्ज़-ओ-अल्फाज़ में जज़्बात अब नहीं मिलते।लफ्ज़-ओ-अल्फाज़ को जज्बातों से मिलाया जाए।चल पड़ा फिर कोई शायद तन्हा।चलो उस शख़्स को अपनों से मिलाया जाए।सिसकियाँ ले रहा शायद कोई।चलो उसके लिए सपनों को सजाया जाए।मिले हर राह में काँटे मुझको।चलो हर राह को फूलों से सजाया जाए।बिखर-बिखर गया हर बार ,फिर नहीं संवरा।चलो अब ज़िंदगी को फिर से संवारा जाए।

लफ्ज़ मरहम,लफ्ज़ नस्तर, लफ्ज़ हौंसला भी होते हैं।लफ्ज़ से लोग मिलते हैं और लफ्ज़ से ही जुदा भी होते हैं।

लोग साथ आएंगे ये जरूरी तो नहीं।
मुश्किल सफ़र में हर किसी से,
ये उम्मीद लगाना अच्छा नहीं होता।
हर सोच आपकी सोच का आईना बन जाएगी।
ऐसी खुशफहमी में जीना भी अच्छा नहीं होता।
आफताब,महताब और सितारों से रौशनी की उम्मीद पर।
चराग जलाना ही छोड़ देना अच्छा नहीं होता।

गुरुवार, 6 अप्रैल 2023

दिल के सुकून के लिए...

कुछ काम शोहरत नहीं, दिल के सुकूं के लिए होते हैं।
जिसको समेटना हो समेटे दौलत।
हम तो अपने नहीं, औरों के लिए सपने संजोते हैं।

बुधवार, 5 अप्रैल 2023

नफरत से जीत सकते हो सिर्फ दुनिया, 
 किसी का दिल नहीं।
 
 नफरती आँखों के आंसुओं में,
  होता कोई शामिल नहीं।
  
  खुद को कुछ भी समझे,
  दौलत ए गुमां में जीने वाला।
अंजाम- ए- ज़िंदगी उसे,
 होता कुछ भी हासिल नहीं।
नफरत से दुनिया जीत सकते हो किसी का दिल नहीं।
 दौलत से बेशुमार मकां बना सकते हो,
  मगर घर नहीं।
  क्योंकि घर मुहब्बत से बनते है,
  दौलत से सिर्फ़ ईंट पत्थरों के मकां ही बनाए जा सकते हैं।

लोग लोगों को नहीं , 
सिर्फ इंसान और इंसानियत को
याद रखते हैं।
 लोग आपके पद को नहीं,
 ऊँचे कद को याद रखते हैं।

लोग आपके खाने को नहीं,
उसमें मिली मुहब्बत को याद रखते हैं।
लोग आपके मिलने को नहीं,
आपसे मिलने से हुई खुशी को याद रखते हैं।
लोग आपके साथ को नहीं,
आपके साथ से मिले अपनेपन को याद रखते हैं।
लोग आपकी शक्ल -ओ- सूरत को नहीं,
आपकी फितरत को याद रखते हैं।
लोग आपके ब्रांडेड कपड़ों को नहीं,
उसमें ढकी शख्सियत को याद करते हैं।

लोग आपकी दौलत को नहीं,
उसकी बदौलत मिली खुशियों को याद रखते हैं।

लोग आपकी हर बात को नहीं,
आपके जज़्बात को याद रखते हैं।

लोग आपकी नज़रों को नहीं,
आपके नज़रिए को याद रखते हैं।

लोग आपके हँसने को नहीं,
आपके हँसने से मिले,
खुशी और ग़म को याद रखते हैं।

लोग आपके गिरने को नहीं,
गिरकर संभलने को याद रखते हैं।

लोग आपके इल्म को नहीं,
आपके तजुर्बे को याद रखते हैं।

लोग आपकी तालीम को नहीं,
आपकी शख्सियत को याद रखते हैं।

लोग आपके चलने की नज़ाकत को नहीं,
किसी को उठाने के लिए बढ़े दो कदमों को याद रखते हैं।

मंगलवार, 4 अप्रैल 2023

सूरज का आना और जाना तय है।
 ग़म के बाद मुस्कुराना तय है।
अंधेरे से घबरा मत ए दोस्त!
सुबह का आना  तय है।
ज़माने की बातों पे न जा,
इसकी तो आदत है बोलना,
सिर्फ़ अपने मकसद पे लग जा,
तेरा वक्त भी आना तय है।

रविवार, 2 अप्रैल 2023

बोलने वालों को बोलने दीजिए,काम अपना करते जाइए।नजरंदाज करके राहों के काँटे,अपनी मंज़िल की ओर बढ़ते जाइए।हँसने वालों का काम ही है हँसना,उनके हँसने पर न जाइए।कुछ लोग हँसकर ही हमारा हौसला बढ़ाते हैं,आप भी हँसिए और आगे बढ़ते जाइए।जो ख़ुद कुछ कर न सके,वे क्या औरों की राह में फूल बिखराएंगे?काम उनका करने दीजिए उनको,आप बस मकसद में अपने लग जाइए।

बोलने वालों को बोलने दीजिए,
काम अपना करते जाइए।
नजरंदाज करके राहों के काँटे,
अपनी मंज़िल की ओर बढ़ते जाइए।
हँसने वालों का काम ही है हँसना,
उनके हँसने पर न जाइए।
कुछ लोग हँसकर ही हमारा हौसला बढ़ाते हैं,
आप भी हँसिए और आगे बढ़ते जाइए।
जो ख़ुद कुछ कर न सके,
वे क्या औरों की राह में फूल बिखराएंगे?
काम उनका करने दीजिए उनको,
आप बस मकसद में अपने लग जाइए

शुक्रवार, 31 मार्च 2023

ठोकरें नज़रिया बदल देती हैं

ठोकरें नज़रिया बदल देती हैं,
 जीने का जरिया बदल देती हैं।
 बड़ी-बड़ी किताबें भी, 
 सिखा न सकीं जो सबक,
 ठोकरें पल में सिखाकर,
 ज़िंदगी का रुख बदल देती हैं।

गुरुवार, 30 मार्च 2023

जब तेरे घर से बुलावा आएगा...

ये दौलत,ये इल्म, ये शोहरत।
ये सब धरा रह जाएगा।
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
न रिश्ते,न नाते, न दिलकश वो बातें।
सब यहीं छूट जाएगा,
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
न खुशियाँ,न ग़म, न ज्यादा, न कम।
ये सब झमेला ख़त्म हो जाएगा।
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
न इसका, न उसका, हुआ जग ये किसका?
तू ये सब जान जाएगा,
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।



राह दिखाना या कांटे बिछाना

राह दिखाना या राह में काँटें बिछाना,
आदमी के माहौल-ओ-फितरत का नतीज़ा होता है।
कोई हर चेहरे पर मुस्कुराहट बांटता है,
कोई छोटी सी मुस्कान तक छीन लेता है।

किसी के ग़म पे हँस रहा था कोई।

किसी के ग़म पे हँस रहा था कोई।
किसी के ज़ख्म पे हँस रहा था कोई।
लगी ठोकर, गिरा वो मुंह के बल।
अकड़ के चल रहा था कोई।
गुमां में हर रिश्ते को भूल गया।
शोहरत-ए-बुलंदियाँ में खोकर,
ख़ुदा को भी भूल गया?
आखिरी वक्त जब आया,
अकेला ही चल रहा था कोई।

बुधवार, 29 मार्च 2023

भूलकर ख़ुद का वजूद,वजूद औरों का बनाते रह गए।इस कोशिश में लोग,हमें जाने क्या - क्या कह गए!रुसवाई भी, जग हँसाई भी हो गई,हम बस ख़ुद को आईने में देखते रह गए।

हम सभी का दिल से, एहतराम करते हैं।किसी को सलाम, किसी को राम राम कहते हैं।मगर भूलते नही कभी, अपनी खुद्दारी को।अपनी अपनी खुद्दारी को जिंदा रखकर ही, हर काम करते हैं।

हम सभी का दिल से, एहतराम करते हैं।
किसी को सलाम, किसी को राम राम कहते हैं।
मगर भूलते नही कभी, अपनी खुद्दारी को।
अपनी अपनी खुद्दारी को जिंदा रखकर ही,
 हर काम करते है।

मंगलवार, 28 मार्च 2023

जो हँसते थे कभी दूसरों के ग़म पर,
आज अपने घर के किसी कोने में,
अपनी हँसी तलाश रहे हैं।
जो शोहरत के गुमां में चूर थे कभी,
घर के आईने में आज ख़ुद को तलाश रहे हैं।

सोमवार, 27 मार्च 2023

नज़रिया और नज़र बदलना आसां नहीं होता।आदमी की फितरत बदलना आसां नहीं होता।देखने वाले आँखों से नहीं,अपनी सोच से दुनिया देखते हैं।उनकी सोच बदलना आसां नहीं होता।

नज़रिया और नज़र बदलना आसां नहीं होता।
आदमी की फितरत बदलना आसां नहीं होता।
देखने वाले आँखों से नहीं,
अपनी सोच से दुनिया देखते हैं।
उनकी सोच बदलना आसां नहीं होता।

रविवार, 26 मार्च 2023

हर किसी को ख़ुदा कुछ ख़ास देता है।किसी को दौलत,किसी को इल्म की सौगात देता है।दौलत का क्या?, ये तो इक रोज़ ख़त्म हो जाएगी।मगर इल्म ही आदमी को, पहचान इक ख़ास देता है।

हौंसला बढ़ाने वाले, दुनिया में बहुत कम मिलते हैं।
किसी को समझने वाले, दुनिया में बहुत कम मिलते हैं।
किसी वीराने को भी, गुलिस्तां जो बना दें।
ऐसे बाग़बान भी, बड़ी क़िस्मत से मिलते हैं।

गुरुवार, 23 मार्च 2023

हसरतें बहुत थीं,मगर वक्त बहुत कम था।भीड़ में भी तन्हा ही रहे, ताउम्र बस यही ग़म था।हम थे सबके मगर, कोई भी मेरा नही।वो भी गैर ही निकला,कल तक जो मेरा सनम था।अब तो आँखें भी खोलने का मन नहीं करता।क्या देखूं?,अब तो वो भी नहीं रहा, जो कभी ज़ख्मों का मरहम था।

गिराके खुद को उठाने से क्या हासिल होगा? किसी को सिर पे बिठाने से क्या हासिल होगा?

जो गुज़र गए, वे कभी लौटकर नहीं आने वाले।ये रास्ते हैं,आखिरी सफ़र को जाने वाले।किसी सामान या शोहरत की ज़रूरत नहीं तुझे।ख़ाली हाथ ही चल देते हैं,इस ओर को जाने वाले।लूटा कभी, छीना कभी, अब साथ क्या ले जाएगा?सबकुछ आपस में बांट लेंगे, तेरे चाहने वाले।दौलत से नहीं,लोगों से मुहब्बत कर, अरे नादान!वरना कल तुझे भुला देंगे,आज तेरी दौलत पे झुकने वाले।

ज़ख्म देता है तो, मरहम भी कोई देता है।कोई ठुकराता,कोई अपना बना लेता है।समझ सका नही,अब तक मैं तेरी रहमत को।कभी मोहताज,कभी आसमां पे बिठा देता है।

ज़ख्म देता है तो, मरहम भी कोई देता है।
कोई ठुकराता,कोई अपना बना लेता है।
समझ सका नही,अब तक मैं तेरी रहमत को।
कभी मोहताज,कभी आसमां पे बिठा देता है।

बुधवार, 22 मार्च 2023

अपनी खुद्दारी को ख़ुद से भी बड़ा समझो।अपनी रुसवाई को, न छोटी ख़ता समझो।ख़ुद से ज्यादा आपको जो याद रखता हो।सिर्फ उसको हमनशी और हमनवां समझो।

अपनी खुद्दारी को ख़ुद से भी बड़ा समझो।
अपनी रुसवाई को, न छोटी ख़ता समझो।
ख़ुद से ज्यादा आपको जो याद रखता हो।
सिर्फ उसको हमनशी और हमनवां समझो।

हर लम्हे का फैसला, ख़ुदा करता है।किसी को मिलाता,किसी को जुदा करता है।लोग समझते हैं कि, अपनों से बिछड़कर जी लेंगे।मगर इसका फैसला भी ख़ुदा करता है।

रविवार, 19 मार्च 2023

कोई न कोई ऐसा ज़िंदगी में,ज़रूर होना चाहिए।जिसके चेहरे,लफ्ज़, हँसी से,उदास दिल में भी सुरूर होना चाहिए।ज़िंदगी में ग़म के दौर हैं, तो खुशियाँ भी तो हैं।खुशियों का मकां बाहर नहीं दिल में हैं,मगर इसका पता आपको हुज़ूर होना चाहिए।...........Surendra Kumar...............

कोई न कोई ऐसा ज़िंदगी में,
ज़रूर होना चाहिए।
जिसके चेहरे,लफ्ज़, हँसी से,
उदास दिल में भी सुरूर होना चाहिए।
ज़िंदगी में ग़म के दौर हैं, तो खुशियाँ भी तो हैं।
खुशियों का मकां बाहर नहीं दिल में हैं,
मगर इसका पता आपको हुज़ूर होना चाहिए।
...........Surendra Kumar...............

मंगलवार, 14 मार्च 2023

न जाने लोग क्यों चेहरे को ओढ़ लेते हैं।किसी और को बनाकर अपना,किसी से मुंह मोड़ लेते हैं।

आईना देखकर सूरत पे गुमां न कर ए दोस्त!

आईना देखकर सूरत पे गुमां न कर ए दोस्त!जिंदगी हर रोज़ तुझे आईना दिखाती है।

आईना देखकर सूरत पे गुमां न कर ए दोस्त!
जिंदगी हर रोज़ तुझे आईना दिखाती है।

ज़माना बदलता है,लोग बदलते हैं,रिश्ते भी अपना रंग बदलते हैं मगर,धूप हो या छांव हो, दोस्त सच्चे , हमेशा साथ साथ चलते हैं।

शनिवार, 11 मार्च 2023

झोंके भी हवा के मुझे जीने नहीं देते।सीखा बड़ी मुश्किल से, ग़म-ए-दौर में जीना।माज़ी के ज़ख्म क्यों मुझे जीने नहीं देते।Date : 12/03/2023*ग़म-ए-दौर : दुखद समय *माज़ी : बीता हुआ समय............Surendra Kumar...........

झोंके भी हवा के मुझे जीने नहीं देते।
सीखा बड़ी मुश्किल से, ग़म-ए-दौर में जीना।
माज़ी के ज़ख्म क्यों मुझे जीने नहीं देते।

Date : 12/03/2023

*ग़म-ए-दौर : दुखद समय 
*माज़ी : बीता हुआ समय
............Surendra Kumar...........

चराग जलते ही अंधेरे सिमट जाते हैं।


चराग जलते ही अंधेरे सिमट जाते हैं।
हौसलों के आगे मुकद्दर भी पलट जाते हैं।
हौंसला तोड़ने वालों की फिक्र मत कर ऐ दोस्त! 
वक्त बदलते ही, ये लोग भी बदल जाते हैं।

शुक्रवार, 10 मार्च 2023

कुछ लोग शायरी की वजह बनकर आते हैं।कुछ जाते हुए खुद शायरी बनकर जाते हैं।कुछ लोग अपनी शख्सियत से दिल में घर कर जाते हैं।कुछ अपनी फितरत से,दिल से उतर जाते हैं।सोच-ओ-फितरत तो बदलकर देखो-2हर नज़र में फिर आप नजर आते हैं।

 कुछ लोग शायरी की वजह बनकर आते हैं।

कुछ जाते हुए खुद शायरी बनकर जाते हैं।

कुछ लोग अपनी शख्सियत से दिल में घर कर जाते हैं।

कुछ अपनी फितरत से,दिल से उतर जाते हैं।

सोच-ओ-फितरत तो बदलकर देखो-2

हर नज़र में फिर आप नजर आते हैं।

कुछ लोग शायरी की वजह बनकर आते हैं।कुछ जाते हुए खुद शायरी बनकर जाते हैं।कुछ लोग अपनी शख्सियत से दिल में घर कर जाते हैं।कुछ अपनी फितरत से,दिल से उतर जाते हैं।ज़माना चढ़ते सूरज को सलाम करता है।शाम ढलते ही चराग रौशन और ज़माने भर केदरवाज़े सूरज चढ़ने तक बंद हो जाते हैं।

गुरुवार, 9 मार्च 2023

रहना है तो लोगों के दिलों में रहो। ईंट पत्थर के मकां में रहना भी कोई रहना है? बसना है तो लोगों की आँखों में बसो,सपनों के शीशमहल में बसना भी कोई बसना है?हँसना हैं तो रोते को हँसाने के लिए हँसो,औरों की बेबसी पर हँसना भी कोई हँसना?Date : 9.03.2023..........Surendra Kumar..........

 रहना है तो लोगों के दिलों में रहो। ईंट पत्थर के मकां में रहना भी कोई रहना है? बसना है तो लोगों की आँखों में बसो,सपनों के शीशमहल में बसना भी कोई बसना है?हँसना हैं तो रोते को हँसाने के लिए हँसो,औरों की बेबसी पर हँसना भी कोई हँसना?Date : 9.03.2023..........Surendra Kumar..........

मंगलवार, 7 मार्च 2023

कुछ लोग कहते हैं, दौलत को अपना समझकर।अपनों के बिना भी जी लेंगे।शायद उनको यह नहीं मालूम,कि दौलत से सपने खरीदे जा सकते हैं, अपने नहीं।...........Surendra Kumar.............

अंधेरों से लड़ने वाले, रौशनी ढूंढ़ लेते हैं। हौसला रखने वाले, बंजर में भी नमी ढूंढ़ लेते हैं।

अंधेरों से लड़ने वाले,                            
रौशनी ढूंढ़ लेते हैं।                                
हौसला रखने वाले,                                
बंजर में भी नमी ढूंढ़ लेते हैं।

चराग़ जलते ही हर तरफ, रौशनी ही रौशनी बिखर जाती है।उनके आने की ख़बर सुनकर, फ़जा़ भी संदल सी महक जाती है।• संदल : चंदन फ़जा़: वातावरण .......... Surendra Kumar...........

सोमवार, 6 मार्च 2023

खुद को समझने में जिंदगी गुज़र गई,गिरकर संभलने में जिंदगी ठहर गई।अंधेरों में उजालों को ढूंढ़ता रहा उम्र भर-2इस कोशिश में, रौशनी बिखर गई।

खुद को समझने में जिंदगी गुज़र गई,
गिरकर संभलने में जिंदगी ठहर गई।
अंधेरों में उजालों को ढूंढ़ता रहा उम्र भर-2
इस कोशिश में, रौशनी बिखर गई।

आपका तहे दिल से शुक्रिया।सही राह दिखाने के लिए,आपका दिल से शुक्रिया।बहुत गुमां था हमें दोस्त!,अपने लफ्जों पर।लफ्ज़- ए - मायने समझाने के लिए,आपका दिल से शुक्रिया।किसी का वक्त, किसी और का नहीं होता।यह सही बात बताने के लिए,आपका दिल से शुक्रिया।गैरज़रूरी भी बहुत कुछ रहता है,हमारी बातों में।आईना मुझको दिखाने के लिए,आपका दिल से शुक्रिया।

मुझको, मुझसे मिलवाने के लिए,
आपका तहे दिल से शुक्रिया।
सही राह दिखाने के लिए,
आपका दिल से शुक्रिया।
बहुत गुमां था हमें दोस्त!,
अपने लफ्जों पर।
लफ्ज़- ए - मायने समझाने के लिए,
आपका दिल से शुक्रिया।
किसी का वक्त, किसी और का नहीं होता।
यह सही बात बताने के लिए,
आपका दिल से शुक्रिया।
गैरज़रूरी भी बहुत कुछ रहता है,
हमारी बातों में।
आईना मुझको दिखाने के लिए,
आपका दिल से शुक्रिया।

अहमियत अपनों की, उनके जाने के बाद पता चलती है। जैसे शमा ए महफिल की अहमियत, बुझने के बाद पता चलती है।

अहमियत अपनों की, 
 उनके जाने के बाद पता चलती है।
 जैसे शमा ए महफिल की अहमियत,
 बुझने के बाद पता चलती है।

मैं चराग हूं , जल तो रहा हूं, बेशक धीरे - धीरे ही सही।अंधेरों से लड़ तो रहा हूं, धीरे - धीरे ही सही।हाथ पर हाथ धरे तो नहीं बैठा हूं, कोशिश तो कर रहा हूं।धीरे धीरे ही सही।मुझे मालूम है मैं कभी भी बुझ सकता हूं,मगर तूफानों से लड़ तो रहा हूं,धीरे धीरे ही सही।ये दुनिया मुझे भुला दे या दिल में रखे, परवाह नहीं।दिल पे दस्तक तो दे रहा हूं, धीरे धीरे ही सही।

मैं चराग हूं , जल तो रहा हूं, बेशक धीरे - धीरे ही सही।
अंधेरों से लड़ तो रहा हूं, धीरे - धीरे ही सही।
हाथ पर हाथ धरे तो नहीं बैठा हूं, कोशिश तो कर रहा हूं।
धीरे धीरे ही सही।
मुझे मालूम है मैं कभी भी बुझ सकता हूं,
मगर तूफानों से लड़ तो रहा हूं,
धीरे धीरे ही सही।
ये दुनिया मुझे भुला दे या दिल में रखे, परवाह नहीं।
दिल पे दस्तक तो दे रहा हूं, धीरे धीरे ही सही।


 

जिनको यकीं खुद पर हो जाए।वो मुश्किलों में भी खुलके मुस्कुराए।ज़माने के भरोसे नहीं चलती, उनकी दुनिया -2जो अपनी मेहनत को ही, अपनी किस्मत बनाए।........... Surendra Kumar..............

जाने वाले ने मुड़कर मुझे देखा तक नहीं,क्या हम भी महज आंसू भर थे?जो उनकी आंखों में ठहर भी न सके।

जाने वाले ने मुड़कर मुझे देखा तक नहीं,क्या हम भी महज आंसू भर थे?जो उनकी आंखों में ठहर भी न सके।

हर मुलाकात का आगाज़ और अंजाम,खुशनुमा रखिए।क्या पता कल वो फिर मिले न मिले।

मिलना बिछड़ना तो जिंदगी का दस्तूर है।कुछ लोग इसे मुहब्बत भी कह देते हैं।

अब कुछ भी देने को नही बचा मेरे पास,आंखों की बारिश में दिल का सारा सैलाब भी बह गया।

कोई समझेगा इस खुशफहमी में मत रहना ए दोस्त!लोग अभी खुद को ही समझ नहीं पाए,तुझे क्या ख़ाक समझेंगे?

रविवार, 5 मार्च 2023

जिंदगी हर किसी को मौका भरपूर देती है।देर से ही सही , सिला मेहनत का ज़रूर देती है।बुझे चराग़ों को भी रौशनी, मयस्सर हो जाती है।जिंदगी जब अंधेरों को नूर देती है।• सिला: परिणाम , फल• मयस्सर : उपलब्ध• नूर : रोशनी,चमक............. Surendra Kumar............

जिंदगी हर किसी को मौका भरपूर देती है।
देर से ही सही , सिला मेहनत का ज़रूर देती है।
बुझे चराग़ों को भी रौशनी, मयस्सर हो जाती है।
जिंदगी जब अंधेरों को नूर देती है।

• सिला: परिणाम , फल
• मयस्सर : उपलब्ध
• नूर : रोशनी,चमक
............. Surendra Kumar............

कोई ना खुदा खुदा को भूलकर अपनी कश्ती को खुद डुबो रहा है।आफताब जिंदगी का सिर पर आ चुका है,और तू अभी तक सो रहा है?

कोई ना खुदा खुदा को भूलकर अपनी कश्ती को खुद डुबो रहा है।आफताब जिंदगी का सिर पर आ चुका है,और तू अभी तक सो रहा है?

शनिवार, 4 मार्च 2023

जैसे खुशबू गुलों की ,फ़ज़ा में बिखर जाती है।वैसे आदत भी आदमी की,असर लाती है।बहार ओ खिजां में भी, मुस्कुराता है वो गुल।जिस पर 'उस' बागबान की नज़र ठहर जाती है।• गुल : फूल। फ़ज़ा : वातावरण• उस : खुदा, ईश्वर• खिजां : पतझड़। बागबान: माली

दौलत - बदौलत से कुछ न मिलेगा।ये तेरी शोहरत से कुछ न मिलेगा।जिसे भी मिला है,जिसे भी मिलेगा।खुदा के करम से वो, मिलकर रहेगा।

दौलत - बदौलत से कुछ न मिलेगा।ये तेरी शोहरत से कुछ न मिलेगा।जिसे भी मिला है,जिसे भी मिलेगा।खुदा के करम से वो, मिलकर रहेगा।

माँ के आंसू, पिता की तकलीफों का,तू ये क्या सिला दे रहा है?जिसने तेरे पाँव के नीचे,कभी खुद को बिछा दिया था-2आज उन्हीं को तू, वृद्धाश्रम जाने की सज़ा दे रहा है

माँ के आंसू, पिता की तकलीफों का,
तू ये क्या सिला दे रहा है?
जिसने तेरे पाँव के नीचे,
कभी खुद को बिछा दिया था-2
आज उन्हीं को तू, वृद्धाश्रम जाने की सज़ा दे रहा है

माँ बाप के बेशुमार अहसानों का, बदला तू क्या चुकाएगा?आज जैसा करके तू खुश हो रहा है नादान?कल वैसा ही सिला, कुदरत से तू पाएगा।

माँ बाप के बेशुमार अहसानों का, बदला तू क्या चुकाएगा?आज जैसा करके तू खुश हो रहा है नादान?कल वैसा ही सिला, कुदरत से तू पाएगा।

शाखों से टूटकर जैसे पत्ते अलग हो जाते हैं।कुछ लोग बिछड़कर भीड़ में,जाने कहां खो जाते हैं।हो जाते हैं वो बेशक आंखों से ओझल,मगर दिल के किसी कोने में,उम्र भर के लिए दस्तक छोड़ जाते हैं।........Surendra Kumar........

शाखों से टूटकर जैसे पत्ते अलग हो जाते हैं।
कुछ लोग बिछड़कर भीड़ में,जाने कहां खो जाते हैं।
हो जाते हैं वो बेशक आंखों से ओझल,
मगर दिल के किसी कोने में,
उम्र भर के लिए दस्तक छोड़ जाते हैं।

........Surendra Kumar........

गुरुवार, 2 मार्च 2023

आपके दो लफ्ज़ किसी का हौंसला बढ़ा सकते हैं। यही हबीब और रकीब बना सकते हैं। दो लफ्ज़ मुहब्बत के बोलने में कंजूसी कैसी?-2 ये लफ्ज़ बिगड़ी हुई हर बात बना सकते हैं।

आपके दो लफ्ज़ किसी का हौंसला बढ़ा सकते हैं।
 यही हबीब और रकीब बना सकते हैं।
 दो लफ्ज़ मुहब्बत के बोलने में कंजूसी कैसी?-2
 ये लफ्ज़ बिगड़ी हुई हर बात बना सकते हैं।
 

बुधवार, 1 मार्च 2023

तूफानी इरादों को कौन रोक पाया है।जिसने खोया है खुद को,उसी ने जिंदगी को पाया है।

जिंदगी की मुश्किलें ही हमें,हमसे मिलवाती हैं।
कौन अपना है ,कौन बेगाना, यह हमें समझाती हैं।


जिंदगी की मुश्किलें ही हमें,हमसे मिलवाती हैं।कौन अपना है ,कौन बेगाना, यह हमें समझाती हैं।

जिंदगी की मुश्किलें ही हमें,
जिंदगी का मतलब समझाती हैं।
फ़र्क अपने और बेगानों में,
करना सिखलाती हैं।


रविवार, 26 फ़रवरी 2023

जो हमारे पास है अभी, मुश्किल में वही काम आता है।कहने को तो समंदर में पानी है बहुत-2पर क्या ये समंदर, किसी की प्यास बुझाता है?.................Surendra Kumar................

हालात जिंदगी में कैसे भी आ जाएं,हौंसला बनाए रखिए।खुद पर यकीन ही तेरी असल मिल्कियत है,यकीन खुद पर मेरे दोस्त बनाए रखिए।

हालात जिंदगी में कैसे भी आ जाएं,
हौंसला बनाए रखिए।
खुद पर यकीन ही तेरी असल मिल्कियत है,
यकीन खुद पर मेरे दोस्त बनाए रखिए।

शनिवार, 25 फ़रवरी 2023

हर सुबह इक नया पैगाम लाती है।सूर्य की हर किरण,रंगों को भर जाती है।

हर सुबह इक नया पैगाम लाती है।सूर्य की हर किरण,रंगों को भर जाती है।

है आफताब हमसे :नहीं जलता किसी को जलाने के लिए।मैं तो जलता हूं सारे ज़माने के लिए।इसलिए मेरी चमक सदियों से बरकरार है,क्योंकि मुझे खुद से भी ज्यादा,सारे जहां से प्यार है। *आफताब : सूर्य

 है आफताब हमसे :
नहीं जलता किसी को जलाने के लिए।
मैं तो जलता हूं सारे ज़माने के लिए।
इसलिए मेरी चमक सदियों से बरकरार है,
क्योंकि मुझे खुद से भी ज्यादा,
सारे जहां से प्यार है।

               *आफताब : सूर्य

दौलत-ओ-शोहरत के पीछे, इंसान इंसान को भूल गया।अपनी हस्ती के गुमां में, रिश्ते तो रिश्ते,खुदा को भी भूल गया?

दौलत-ओ-शोहरत के पीछे,
 इंसान इंसान को भूल गया।
अपनी हस्ती के गुमां में,  
रिश्ते तो रिश्ते,
खुदा को भी भूल गया?

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023

जिंदगी और मुश्किलों का रिश्ता बहुत पुराना है।जो मुश्किलों में भी मुस्कुराना जानते हैं -2,उन्हे जिंदगी से अभी बहुत कुछ पाना है। जो मिलना है मिल ही जाएगा। पतझड़ में भी फूल खिल ही जाएगा। बस जिंदगी हँसकर बिताना है। जो बात सिर्फ मुस्कुराने की करते हैं, उन्हे ही याद रखता, ये ज़माना है।............Surendra Kumar...............

जिंदगी और मुश्किलों का रिश्ता बहुत पुराना है।
जो मुश्किलों में भी मुस्कुराना जानते हैं -2,
उन्हे जिंदगी से अभी बहुत कुछ पाना है।
 जो मिलना है मिल ही जाएगा।
 पतझड़ में भी फूल खिल ही जाएगा।
 बस जिंदगी हँसकर बिताना है।
 जो बात सिर्फ मुस्कुराने की करते हैं,
 उन्हे ही याद रखता, ये ज़माना है।
............Surendra Kumar...............

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2023

ये मात्र एक शब्द नहीं बल्की जीवन का सार है।एक बच्चे के लिए तो ये सारा संसार है।एक "माँ" ही तो है जो शब्दों से परे , चेहरे को भावों को पढ़ना जानती है। नौनिहाल के रुदन के रूपों को, अर्थ देना जानती है। खुद गीले में ठिठुरकर, कलेजे के टुकड़े को , परियों की नगरी में घुमाना जानती है। ये "माँ" ही तो है जो 'भूख नहीं' कहकर,अपना निवाला बच्चों को देना जानती है।ये "माँ" ही तो है जो काला टीका लगाकर,बुरी नज़र से बचाना जानती है।ये "माँ" ही तो है जो बच्चे की छोटी सी सिसकार पर,रात - रात भर जागना जानती है।सारा संसार रूठ जाए , चाहे हर सुख छूट जाए,लेकिन ये "माँ" ही तो है जो अपने बच्चों से,रूठना ही नहीं जानती है।इसीलिए धरती को भी शायद माँ ही कहते हैं,जो सबकुछ सहकर, कुछ लेना नहीं, सिर्फ देना जानती है। .......... Surendra Kumar..........

ये मात्र एक शब्द नहीं बल्की जीवन का सार है।
एक बच्चे के लिए तो ये सारा संसार है।
एक "माँ" ही तो है  जो शब्दों से परे ,
 चेहरे को भावों को पढ़ना जानती है।
 नौनिहाल के रुदन के रूपों को, अर्थ देना जानती है।
 खुद गीले में ठिठुरकर, कलेजे के टुकड़े को ,
 परियों की नगरी में घुमाना जानती है।
 ये "माँ" ही तो है जो 'भूख नहीं' कहकर,
अपना निवाला बच्चों को देना जानती है।
ये "माँ" ही तो है जो काला टीका लगाकर,
बुरी नज़र से बचाना जानती है।
ये "माँ" ही तो है जो बच्चे की छोटी सी सिसकार पर,
रात - रात भर जागना जानती है।
सारा संसार रूठ जाए , चाहे हर सुख छूट जाए,
लेकिन ये "माँ" ही तो है जो अपने बच्चों से,
रूठना ही नहीं जानती है।
इसीलिए धरती को भी शायद माँ ही कहते हैं,
जो सबकुछ सहकर, कुछ लेना नहीं, सिर्फ देना जानती है।

   .......... Surendra Kumar..........



 
 
 
 
 
 
 

जो हमेशा मुस्कुराना जानते हैं।वो रिश्तों को संजोना जानते हैं।उनके लिए वजूद उनका मायने नहीं रखता।जो अपनो को ही सबकुछ मानते है।

जो हमेशा मुस्कुराना जानते हैं।वो रिश्तों को संजोना जानते हैं।उनके लिए वजूद उनका मायने नहीं रखता।जो अपनो को ही  सबकुछ मानते है।

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2023

वक्त हर पल का हिसाब लेता है।देता है तो बेहिसाब देता है,लेता है तो बेहिसाब लेता है।गुमां न कर तू अपनी शोहरत पर -2वो ही पल में खिताब देता है, वो ही पल में खिताब लेता।*वो ही : ईश्वर

वक्त हर पल का हिसाब लेता है।
देता है तो बेहिसाब देता है,लेता है तो बेहिसाब लेता है।
गुमां न कर तू अपनी शोहरत पर -2
वो ही पल में खिताब देता है, वो ही पल में खिताब लेता।

*वो ही : ईश्वर



सोमवार, 20 फ़रवरी 2023

रूठने वाले तो अपने ही हुआ करते हैं।तू खुशनसीब है, जो तुझसे कोई रूठा है।

रूठने वाले तो अपने ही हुआ करते हैं।तू खुशनसीब है, जो तुझसे कोई रूठा है।

रूठने वाले को मनाने में देर न कर ऐ दोस्त!क्या पता कल वो फिर, मिले न मिले।

जो है तेरी किस्मत में , वो कोई ले नहीं सकता।
जो नहीं तेरे नसीब में,  कोई वो दे नहीं सकता।
डूबने वाले तो, साहिल पे भी, डूब जाते हैं।
जिसकी कश्ती का  ना खुदा खुदा हो।
 उसे समंदर भी डुबो नहीं सकता।

जो है तेरी किस्मत में , वो कोई ले नहीं सकता।जो नहीं तेरे नसीब में, कोई वो दे नहीं सकता।डूबने वाले तो, साहिल पे भी, डूब जाते हैं।जिसकी कश्ती का ना खुदा खुदा हो। उसे समंदर भी डुबो नहीं सकता।

जो है तेरी किस्मत में , वो कोई ले नहीं सकता।
जो नहीं तेरे नसीब में,  कोई वो दे नहीं सकता।
डूबने वाले तो, साहिल पे भी, डूब जाते हैं।
जिसकी कश्ती का  ना खुदा खुदा हो।
 उसे समंदर भी डुबो नहीं सकता।

रविवार, 19 फ़रवरी 2023

मतलबी दुनिया में....


मतलबी दुनिया में, मतलब परस्ती भी शर्मिंदा है।
इंसानियत तोड़ रही दम, सिर्फ इंसान ज़िंदा है।

किसी शै में खुशी तलाश न कर

किसी शख्स किसी शय में खुशी तलाश न कर।
ये दिल की जागीर है, कहां दुनिया में मिलती है?

हर सुबह आपकी खुशनुमा हो।जिंदगी में न ग़म का नामो निशां हो।खुशियां ही खुशियां हो हर तरफ,आप जहां हो... जहां हो.. जहां हो।

हर सुबह आपकी खुशनुमा हो।
जिंदगी में न ग़म का नामो निशां हो।
खुशियां ही खुशियां हो हर तरफ,
आप जहां हो... जहां हो.. जहां हो।

जो लोग वक्त की जमीं पर, अपने कदमों के निशां छोड़ जाते हैं।लेकर जाते हैं वो दुनिया से सारे ग़म, खुशियां और के लिए छोड़ जाते हैं।

जो लोग वक्त की जमीं पर, 
अपने कदमों के निशां छोड़ जाते हैं।
लेकर जाते हैं वो दुनिया से सारे ग़म, 
खुशियां और के लिए छोड़ जाते हैं।

जो लोग वक्त की जमीं पर, 
अपने कदमों के निशां छोड़ जाते हैं।
समेटकर दुनिया जहां के ग़म,
खुशियां और के लिए छोड़ जाते हैं।

लोग क्या सोचेंगे इसकी चिंता उतनी ही कीजिए जिससे आपकी जिंदगी में खलल न पड़े। क्योंकि लोग आपके हिसाब से नहीं अपने हिसाब से सोचते हैं।लोगों के हिसाब से जिंदगी जीने की कोशिश में हम अपना हिसाब भी भूल जाते हैं। अपने दिल से पूछिए। अगर आपको लगता है कि आप सही हैं तो किसी को साबित करने की जरूरत नहीं है। बस अपना काम करते रहिए। वक्त खुद हर सवाल का जवाब दे देता है।

शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

लोगों की फिक्र उतनी ही कीजिए जिससे आपकी जिंदगी में खुशियां बनी रहें। लोगों के हिसाब से जिंदगी जीने की कोशिश में हम अपना हिसाब भी भूल जाते हैं। अपने दिल से पूछिए। अगर आपको लगता है कि आप सही हैं तो किसी को साबित करने की जरूरत नहीं है। बस अपना काम करते रहिए। वक्त खुद हर सवाल का जवाब दे देता है।

लोगों की फिक्र उतनी ही कीजिए जिससे आपकी जिंदगी में खुशियां बनी रहें। 
लोगों के हिसाब से जिंदगी जीने की कोशिश में हम अपना हिसाब भी भूल जाते हैं। 
अपने दिल से पूछिए। अगर आपको लगता है कि आप सही हैं तो किसी को साबित करने की जरूरत नहीं है। बस अपना काम करते रहिए। वक्त खुद हर सवाल का जवाब दे देता है।

जिंदगी में इक मोड़ ऐसा भी आता है जब जिंदगी हमसे सवाल करती है :

तुमने दुनिया को क्या दिया,जिससे दुनिया तुम्हे याद रखे?
तुमने कितनों का दिल दुखाया?
तुमने कितनों के जख्मों पर मरहम रखा?
तुमने कितनों की जिंदगी को खुशियों से रौशन किया?
तुमने कितनों की जिंदगी को अंधेरे में ढकेल दिया?
तुमने कितने लोगों के ग़म को अपनाकर बदले में उनकी जिंदगी को खुशियों से भर दिया?
 अपनी जिंदगी में तुमने क्या खोया और क्या पाया?
 इंसान इन सवालों के जवाब ढूंढ़ता रह जाता है और जिंदगी अलविदा कहकर रुखसत हो जाती है। इसलिए 
हर दिन सुबह की शुरुआत में कहिए :
"हे ईश्वर! आपकी कृपा से मुझे आज का शुभ दिन मिला है। अपनी कृपा मुझपर बनाए रखना। मेरी वाणी, मेरे व्यवहार से किसी को भी कोई ठेस न पहुंचे।"
रात को सोते समय कहिए :
" हे परमेश्वर! आज आपकी कृपा प्राप्त हुई इसके लिए आपका धन्यवाद। यदि जाने अंजाने आज मुझसे किसी के दिल को ठेस पहुंची हो तो अज्ञानी समझकर मुझे क्षमा करना।"
ईश्वर परम दयालु है। वो हम पर अपनी नज़र और कृपा सदैव बनाए रखता है। हम उसे भूल जाएं लेकिन वो हमे कभी नहीं भूलता।
                  ......Surendra Kumar.....

जो है उसी को संजोकर रखिए। पूर्णता की खोज मिथ्या है। पूर्णता की खोज में जो हमारे पास है हम उसका भी आनंद नहीं उठा पाते। याद रखिए संसार में कोई भी पूर्ण नहीं है। परमेश्वर के अतिरिक्त कोई भी संपूर्ण नहीं है।

 जो है उसी को संजोकर रखिए।
 पूर्णता की खोज मिथ्या है।
 पूर्णता की खोज में जो हमारे पास है हम उसका भी आनंद नहीं उठा पाते। याद रखिए संसार में कोई भी पूर्ण नहीं है। परमेश्वर के अतिरिक्त कोई भी संपूर्ण नहीं है।


गर्व,घमंड,लोभ,ईर्ष्या,धन-दौलत, और शोहरत इन सवारियों के लिए जीवन की आखिरी गाड़ी में कोई भी सीट नहीं होती।

गर्व,घमंड,लोभ,ईर्ष्या,धन-दौलत, और शोहरत इन सवारियों के लिए जीवन की आखिरी गाड़ी में कोई भी सीट नहीं होती। 



बुधवार, 15 फ़रवरी 2023

आपके जाने का अगर किसी को कोई दुख नहीं..

आपके जाने का अगर किसी को कोई दुख नहीं।
तो समझ लीजिए कि आपके होने का भी कोई अर्थ नहीं था। आपकी जिंदगी ऐसी होनी चाहिए कि आपके होने और नहीं होने का कोई अर्थ हो।

न हो आपको कभी, तनिक भी दुख का आभास।खुशियां ही खुशियां खेले,सदा आपके आसपास।

न हो आपको कभी, तनिक भी दुख का आभास।
खुशियां ही खुशियां खेले,सदा आपके आसपास।
होठों पर रहे हमेशा मुस्कुराहट, न हो आप कभी भी उदास।
आपका दिन शुभ हो, सुप्रभात! सुप्रभात!

.............Surendra Kumar................

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2023

शब्दों की महिमा अनंत है।शब्द ही भविष्य की दशा और दिशा तय करते हैं।

शब्दों की महिमा अनंत है।
शब्द ही भविष्य की दशा और दिशा तय करते हैं।
शब्द रिश्ते जोड़ते हैं, शब्द ही रिश्ते तोड़ते भी हैं।
शब्द ही सुकून देते हैं, शब्द ही बेचैनी भी देते हैं।
शब्द ही दवा, दुआ और अमृत है, शब्द ही विष भी है।
शब्द ही भोजन को स्वादिष्ट बनाता है।
शब्द ही स्वादिष्ट पकवान को भी बेस्वाद बनाता है।
शब्द ही महाभारत करवा सकता है।
शब्द ही कालिदास बना सकता है।
शब्द ही तुलसीदास भी बना सकता है।
शब्द ही सम्मान दिलाता है।
शब्द ही अपमान भी दिलाता है।
अगर दिल से निकले आत्मा को परमात्मा से भी मिलाता है।




सोमवार, 13 फ़रवरी 2023

बिछाना राह में कांटे, कुछ लोगों की फितरत होती है।पाई - पाई का हिसाब रखती है, ये जो कुदरत होती है।

बिछाना राह में कांटे,  कुछ लोगों की फितरत होती है।
पाई - पाई का हिसाब रखती है, ये जो कुदरत होती है।

बिछाना राह में कांटे, कुछ लोगों की फितरत होती है।बदले में उनको भी कांटे ही देती है, ये जो कुदरत होती है।

बिछाना राह में कांटे, कुछ लोगों की फितरत होती है।
बदले में उनको कांटे ही देती है, ये जो कुदरत होती है।

हमारे पास जो है दुनिया को हम वही देते हैं। बदले में दुनिया से वापस भी वही मिलता है जो हमने दिया था।

हमारे पास जो है दुनिया को हम वही देते हैं।
 बदले में दुनिया से वापस भी वही मिलता है जो हमने दिया था। यही प्रकृति का न्याय है। लेकिन विडंबना यह है कि मनुष्य देता कुछ और है पाने की उम्मीद कुछ और करता है।

राहों में काँटे बिछा लो चाहे जितने। इरादे मजबूत हो तो शूल भी फूल बन जाते हैं।

राहों में काँटे बिछा लो चाहे जितने।
 इरादे मजबूत हो तो शूल भी फूल बन जाते हैं।

कुछ लोग खुद को समझते हैं हाकिम।वो इतना भी नहीं जानते कि, सारे जहां का हाकिम तो ऊपर बैठा है।

कुछ लोग खुद को समझते हैं हाकिम।
वो इतना भी नहीं जानते कि,
 सारे जहां का हाकिम तो ऊपर बैठा है।

संचित कर्म ही मनुष्य का स्वरूप निर्धारित करते हैं

शास्त्रों में उल्लिखित है:
संचित कर्मों के अनुसार ही मनुष्य का सांसारिक स्वरूप निर्धारित होता है। जन्म जन्मांतरों के संचित कर्मों के अनुसार ही मनुष्य शुभ-अशुभ फल भोगता है। परमात्मा दयालु है इसलिए शास्त्रों में यह भी उल्लिखित हैं कि मनुष्य अपने सद्कर्मों के द्वारा अशुभ फलों को न्यून भी कर सकता है। किंतु अहं के वशीभूत  मनुष्य इस शाश्वत सत्य को जानते हुए भी सद्कर्मों की ओर प्रवृत्त नहीं होता।
इसी का नाम कलियुग है।



शनिवार, 11 फ़रवरी 2023

तुमको क्या मिला, मायने यह नहीं रखता।तुमने क्या दिया, ज़माना इसी से चलता है।सूरज ने भी कभी, धूप का हिसाब नहीं रखा।वो तो सारे जहां के लिए जलता है।रोज निकलता है, रोज ढलता है।रिश्ते रंग बदलते हैं,ज़माना भी रंग पर रंग बदलता है।उस चराग़ की रौशनी कभी कम नहीं होती,जो अपने अंधेरों को भूलकर,लोगों के लिए जलता है।

तुमको क्या मिला,मायने यह नहीं रखता।
तुमने क्या दिया,ज़माना इसी से चलता है।
सूरज ने भी कभी, अपनी धूप का हिसाब नहीं रखा।
वो तो सारे जहां के लिए जलता है।
रोज निकलता है, रोज ढलता है।
रिश्ते रंग बदलते हैं,ज़माना भी  रंग पर रंग बदलता है।उस चराग़ की रौशनी कभी कम नहीं होती,
जो अपने अंधेरों को भूलकर,लोगों के लिए जलता है।

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2023

फुरसत के कुछ पल, किसी अनमोल ख़ज़ाने से कम नहीं होते।

फुरसत के कुछ पल, 
किसी अनमोल ख़ज़ाने से कम नहीं होते।
जो समझते हैं इन पलों की अहमियत,
 उनकी जिंदगी में कभी ग़म नहीं होते।

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2023

दिल इतना तो खुला रखना कि, चार कांधों का साथ मिल जाए। बाद जाने के तेरे, न ये ज़माना मुस्कुराए।

दिल इतना तो खुला रखना कि,
 चार कांधों का साथ मिल जाए। 
बाद जाने के तेरे, न ये ज़माना मुस्कुराए।

बंद हो जाएंगी कभी भी आंखें।साँसें भी अलविदा कह देंगी।

बंद हो जाएंगी कभी भी आंखें।
साँसें भी अलविदा कह देंगी।
रहेगी ज़िंदा सिर्फ मुस्कुराहट तेरी।
सब मुलाकातें भी अलविदा कह देंगी।

• सब मुलाकातें : रिश्ते नातें, यार - दोस्त 

हमारे शब्द ही हमारे व्यक्तित्व का दर्पण हैं।

हमारे शब्द ही हमारे व्यक्तित्व का दर्पण हैं।
शब्द ही ब्रह्म है। यही सृष्टि का आधार है।
शब्दों का दिल तोड़ देने वाला प्रयोग जितना आसान है,
शब्दों का दिल छू लेने वाला प्रयोग उतना ही मुश्किल।
बिना कुछ पाने की इच्छा रखे,सबका भला चाहने का भाव रखना अत्यंत कठिन कार्य है। ईश्वर की कृपा के बिना यह दैवीय भाव प्राप्त नहीं होता।

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दिल किसी का मत दुखाना, दिल में खुदा रहता है।
मंजिल तो सबकी एक है, बस रास्ता जुदा रहता है।

रेत के आशियां को,तूफानों से बचाकर रखना।

रेत के आशियां को, तूफां से बचाकर रखना।
अपनी रुसवाई का ग़म, दिल में छुपाकर रखना।
हंसेंगे लोग,कहेंगे पागल-2
अपने अश्कों को, तबस्सुम-सा सजाकर रखना।


दिल ए किताब का पन्ना

दिल -ए -किताब का पन्ना,हर किसी के लिए नहीं खुलता।जिधर यकीन हो जाए,तो खुद ब खुद खुल जाता है।

कोई पंखों से, कोई हौसलों से उड़ता है।

कोई पंखों से, कोई हौसलों से उड़ता है।
मंजिल तभी मिलती है, जब आदमी,
अपनी ज़मीं से जुड़ता है।

मजिलों के रास्ते में, तूफान तो मिलते हैं।

मजिलों के रास्ते में, तूफान तो मिलते हैं।
खिलने वाले फूल तो,  सहरा में भी खिलते हैं।

सोमवार, 6 फ़रवरी 2023

जुबां खामोशियों की, लफ्जों की मोहताज़ नहीं होती...

जुबां खामोशियों की, लफ्जों की मोहताज़ नहीं होती।
  रुख़ की सिलवटों से जो बात निकल जाती है-2
 लफ्जों-अल्फाजों से वो बात नहीं होती।
  

आपका हंसता मुस्कुराता चेहरा.....


आपका हंसता मुस्कुराता चेहरा,
मेरे दिन का खुशनुमा आगाज़ था।
ऐसा लगता था जैसे कोई अपना मेरे पास था।


कल के बाद इक नई शुरुआत होगी...

कल के बाद इक नई शुरुआत होगी।
न आपसे, न किसी और से बात होगी।

चराग़ सूरज को जलना सिखा रहे हैं।

चराग़  सूरज को जलना सिखा रहे हैं।
दो कदम ठीक से भी जो चल न सके,
वो दूसरों को चलना सिखा रहे हैं।

मैं जलता नहीं किसी घर को जलाने के लिए।

मैं जलता नहीं किसी घर को जलाने के लिए।
मैं तो जलता हूं सारे ज़माने के लिए।

चांद का नूर

चांद का नूर, बहुत दूर, बहुत दूर तक बिखरता है।
ये कोई चराग़ नहीं, जो कभी भी ढल जाए।

किसी शख्स, किसी शै में....


किसी शख्स किसी  शै में, खुशी तलाश न कर।
ये तो जागीर है दिल की, कहां दुनिया में मिलती है?

ताउम्र जिंदगी मेरी तलाश में रही....

ताउम्र जिंदगी मेरी तलाश में रही।
अब मिला तो वो कहती है-
"मुझको जाना है।"

ग़ज़ल का दर्द से रिश्ता बहुत पुराना है।

ग़ज़ल  का दर्द से रिश्ता बहुत पुराना है।
ये आम शै नहीं, जो हर दुकां में मिल जाए।

रविवार, 5 फ़रवरी 2023

मतलबी दुनिया में....

मतलबी दुनिया में, मतलब परस्ती भी शर्मिंदा है।
इंसानियत तोड़ रही दम,सिर्फ इंसान ज़िंदा है।

चांद पागल है जाने क्या ढूंढ़े...

चांद पागल है, जाने क्या ढूंढ़े?
 सहर होते ही, तेरा अक्स भी मिट जाएगा।

शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

अपनी आंखों के समंदर को संभाला हमने

अपनी आंखों के समंदर को संभाला हमने।
कहीं ज़रा सा भी छलका तो डूब जाऊंगा।
........ Surendra Kumar..........

महफिल ए दुनिया में आदमी क्यों तन्हा है,....,

महफिल ए दुनिया में, आदमी क्यों तन्हा है।
जिंदगी के मेले में, आदमी क्यों तन्हा है?
घिरा है रिश्तों से मगर, फिर भी क्यों तन्हा है?
दोस्त है, दुश्मन है, हबीब ओ रकीब भी हैं।
सिसकियां लेता हुआ, आदमी क्यों तन्हा है?

जिंदगी की राह में......

जिंदगी की राह में यूं तो शख्स बेशुमार मिलते है।
पर चंद चराग़ ही तूफान के साथ जलते हैं।

हर शख्स में अक्स अपना

हर शख्स में अक्स अपना ढूंढ़ा नहीं करते ऐ मेरे दोस्त!
क्योंकि हर शख्स ,आईना नहीं होता।

वक्त इतना भी नहीं कि दुआ सलाम भी कर लेते

वक्त इतना भी नहीं की, दुआ सलाम भी कर लेते।
काम से मिल गई हो फुरसत,
तो ज़रा राम राम भी कर लेते।

अपने अपने नहीं गैरों की बात रहने दो

अपने, अपने नहीं गैरों की बात रहने दो।
कोई समझे कि नहीं, दिल की बात कहने दो।

कल थे जिनके लिए हम रौनक ए महफिल की तरह।
आज हम हो गए उनके लिए, पत्थर की तरह।
उनकी आंखों में न आसूं, कभी आने पाएं।
अश्क आंखों से मेरी बहते हैं तो बहने दो।

हमने अपनों के लिए, ग़म हैं बेशुमार सहे।
वक्त बदला तो ये अपने, मेरे अपने न रहे।
कोई पागल कहे, मुझको तो आज कहने दो।
अपने,अपने नहीं गैरों की बात रहने दो....


गिर गिर के संभलना

गिर गिरके संभलना अब सीख लिया हमने।
दुनिया को तो बदल न सके,इसलिए खुद को ही
बढ़िया हमने।

कभी किसी का बुरा...

कभी किसी का भी बुरा नहीं किया हमने।
लोग न जाने क्यों खंजर उठाए फिरते हैं।