मेरे गीत, मेरी ग़ज़लें
JAGJIT SINGH
GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
गुरुवार, 30 मार्च 2023
किसी के ग़म पे हँस रहा था कोई।
किसी के ग़म पे हँस रहा था कोई।
किसी के ज़ख्म पे हँस रहा था कोई।
लगी ठोकर, गिरा वो मुंह के बल।
अकड़ के चल रहा था कोई।
गुमां में हर रिश्ते को भूल गया।
शोहरत-ए-बुलंदियाँ में खोकर,
ख़ुदा को भी भूल गया?
आखिरी वक्त जब आया,
अकेला ही चल रहा था कोई।
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