JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

बुधवार, 29 मार्च 2023

भूलकर ख़ुद का वजूद,वजूद औरों का बनाते रह गए।इस कोशिश में लोग,हमें जाने क्या - क्या कह गए!रुसवाई भी, जग हँसाई भी हो गई,हम बस ख़ुद को आईने में देखते रह गए।

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