JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

शुक्रवार, 26 मई 2023

वजूद

आपका वजूद ही, आपकी पहचान है।
इस वजूद से ही दुनिया में तेरा नाम है।
अगर वजूद ही नही,फिर क्या रह जाएगा?
खोकर वजूद ज़माने भर की ठोकरें खाएगा।
यहाँ जिसे भी देखो,
अपने वजूद के लिए ही तो लड़ रहा है।
गर खुद से न हो सका तो,
दूसरों के सपनों को भी रौंदकर,
आगे बढ़ रहा है।
खुद से दुनिया को बदलने की हिम्मत रखिए।
जो ख़ुद ही बदल जाए, वो वजूद ही क्या है!

गुरुवार, 25 मई 2023

सफर

सफ़र खत्म होते ही,
हमसफर भी दूर जायेंगे।
हर कदम साथ चलने वाले ,
फिर,जाने कहाँ खो जाएंगे।
दिल के किसी कोने में बस,
कुछ यादें,कुछ बातें,कुछ पल 
बाकी रह जाएंगे।
अभी बाकी हैं जो पल,
उनको जी लो जी भरके,
फिर मिले या न मिलें,
दिल में बसाने वाले।

गुरुवार, 18 मई 2023

अच्छा नहीं होता

जलते चराग को बुझाना अच्छा नहीं होता।
रौशनी की चाह मे किसी घर को जलाना,
अच्छा नहीं होता।
खुशी न दे सको किसी को,कोई बात नहीं।
किसी के आंसुओं पे मुस्कुराना,
अच्छा नहीं होता।

बुधवार, 17 मई 2023

मां की ममता

माँ सलाम,  तेरी मीठी मीठी लोरी को।
माँ सलाम,  तेरी उंगली से बंधी,प्रेम की अटूट डोरी को।
माँ सलाम, तेरे सजल नैनों को।
अपने खून सींचा है तूने तन मेरा,
माँ  सलाम, तेरे उन नौ महीनों को।
माँ  सलाम मेरे इंतजार में बेचैन,
तेरी उन आंखों को।
सिर मेरा अपनी गोदी में रख,
अपलक जागकर बिताई उन रातों को।
तेरी ममता का मोल कोई हो नहीं सकता।
ज़रा सी खरोच भी कलेजे के टुकड़ों को आ जाए तो,
मन तेरा चैन से सो नहीं नहीं सकता।
रिश्ते हजारों मिल जाए इस दुनिया मगर,
माँ तेरे जैसा कोई,
हो नहीं सकता।
हो नहीं सकता!
हो नहीं सकता!

मंगलवार, 16 मई 2023

रूठने का मज़ा

छोड़िए, रखा क्या है!
दुनिया को समझने और समझाने में!
बस खुलकर मुस्कुराइए,
पैसे नहीं लगते मुस्कुराने में।
बहुत नाजुक होते हैं,रिश्ते, संभालकर रखिए।
वक्त नहीं लगता टूट जाने में।
रूठना , मनाना तो खुशनुमा ज़िंदगी का हिस्सा है,
कोई मजा लेता है मनाने का, 
किसी को आता है मज़ा रूठ जाने में।

शुक्रवार, 12 मई 2023

रोने वाले को थोड़ा हंसा दीजिए

गिरने वाले को बढ़कर, उठा लीजिए।
रोने वाले को थोड़ा हँसा दीजिए।
मुश्किलें राह की न कभी होंगीं कम।
इन राहों को अपना बना लीजिए।
हौंसला कोई देगा, हँसेगा कोई।
हँसने वालों को हँसकर भुला दीजिए।
हमको समझे जो, बांटे हमारे जो ग़म।
उसको आँखो में अपनी बसा लीजिए।
चाहे आंसू मिले,या मिले हर खुशी।
दिल से अपने सभी को दुआ दीजिए

रविवार, 7 मई 2023

औरों के नाम करता हूं

ज़िंदगी का हर पल औरों के नाम करता हूं।
अपने लिए नहीं, दूसरों की खुशियों के लिए,
हर काम करता हूं।
कौन,क्या समझता हैं ,इसकी फिक्र नहीं मुझे।
मैं तो अपना  हर दिन, सिर्फ इंसानियत के नाम करता हूं।
धन,दौलत या शोहरत की चाह नहीं मुझको।
जो अब तक मिला है ख़ुदा से मुझको,
मैं उसे भी औरों के नाम करता हूं।
जो साथ हैं मेरे और नहीं भी।
मैं सबको सलाम करता हूं।
चाहे हबीब हो या रकीब,खुश रहे हर कोई।
मैं दुआ यहीं ख़ुदा से सुबह शाम करता हूं।
सुबह शाम करता हूं।
सुबह शाम करता हूं।

मैंने कुछ नहीं माँगा, बिन माँगे ही मुझको,बहुत कुछ मिल गया।जहां उम्मीद नहीं थी,महज़ एक गुल की,वहां गुलिस्तां सारा मिल गया।जी रहा था खुद में, दूर अपनों से होकर।जब से छोड़ा है खुद को,तबसे अपनों से मैं जैसे मिल गया।

लोगों की खातिर अपनी खुशियाँ लुटा दीजिए।बेशक आँखो में आंसू हो आपकी,मगर जितना हो सके,लोगों को बस खुशियाँ ही खुशियाँ दीजिए।हों ज़िंदगी मे आपकी, चाहे जितने भी वीराने,जिदंगी औरो की, ए दोस्त!, गुलिस्तां बना दीजिए

शुक्रवार, 5 मई 2023

हर शख्स हो हम सा , ये ज़रूरी तो नहीं,इसी उम्मीद में हर शख़्स तन्हा रह गया। इजाज़त महज़ कुछ लोगों को ही थी, मगर हर कोई हमसे, जाने क्या-क्या कह गया। पूछा गुलों से हमने,,तुम्हे कांटों से डर नहीं लगता? मेरे सवाल पर हर गुल,सिर्फ हँसकर रह गया। धार तो बहुत तेज़ होती है, ज़िंदगी के दरिया की। जो हँसा वही रह गया, और जो रोया, यूं ही बह गया।

हम सिर्फ कहने में नहीं,करने में विश्वास रखते हैं।घोर अंधेरों के बीच भी उजालों की आस रखते हैं।सबकी राहों से कांटों को चुनकर हम।राहों को भी गुलों से भरने में विश्वास रखते हैं।आज नहीं तो कल होगी,सुबह ज़रूर होगी।अंधेरों से डरकर बैठने वाले नहीं हम,सूरज को बादलों से निकालने,का जारी प्रयास रखते हैं।

सोमवार, 1 मई 2023

चार दिन ही तो मिले हैं जिंदगानी के,
 इन्हे नफरतों में यूं तो न ज़ाया कीजै।
 भूल जाओगे अपना हर ग़म,
 कभी 'ख़ुद' से भी बाहर आया कीजै।
 याद रखती उन्हीं को दुनिया है, 
 जो जलके रोशनी लुटाते हैं।
चराग बन न सको गर तो कोई बात नहीं,
जो जल रहा है उसे तो न बुझाया कीजै।