JAGJIT SINGH
- GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
बुधवार, 31 मई 2023
रविवार, 28 मई 2023
शनिवार, 27 मई 2023
शुक्रवार, 26 मई 2023
वजूद
आपका वजूद ही, आपकी पहचान है।
इस वजूद से ही दुनिया में तेरा नाम है।
अगर वजूद ही नही,फिर क्या रह जाएगा?
खोकर वजूद ज़माने भर की ठोकरें खाएगा।
यहाँ जिसे भी देखो,
अपने वजूद के लिए ही तो लड़ रहा है।
गर खुद से न हो सका तो,
दूसरों के सपनों को भी रौंदकर,
आगे बढ़ रहा है।
खुद से दुनिया को बदलने की हिम्मत रखिए।
जो ख़ुद ही बदल जाए, वो वजूद ही क्या है!
गुरुवार, 25 मई 2023
सफर
सफ़र खत्म होते ही,
हमसफर भी दूर जायेंगे।
हर कदम साथ चलने वाले ,
फिर,जाने कहाँ खो जाएंगे।
दिल के किसी कोने में बस,
कुछ यादें,कुछ बातें,कुछ पल
बाकी रह जाएंगे।
अभी बाकी हैं जो पल,
उनको जी लो जी भरके,
फिर मिले या न मिलें,
दिल में बसाने वाले।
बुधवार, 24 मई 2023
मंगलवार, 23 मई 2023
सोमवार, 22 मई 2023
रविवार, 21 मई 2023
शनिवार, 20 मई 2023
गुरुवार, 18 मई 2023
अच्छा नहीं होता
जलते चराग को बुझाना अच्छा नहीं होता।
रौशनी की चाह मे किसी घर को जलाना,
अच्छा नहीं होता।
खुशी न दे सको किसी को,कोई बात नहीं।
किसी के आंसुओं पे मुस्कुराना,
अच्छा नहीं होता।
बुधवार, 17 मई 2023
मां की ममता
माँ सलाम, तेरी मीठी मीठी लोरी को।
माँ सलाम, तेरी उंगली से बंधी,प्रेम की अटूट डोरी को।
माँ सलाम, तेरे सजल नैनों को।
अपने खून सींचा है तूने तन मेरा,
माँ सलाम, तेरे उन नौ महीनों को।
माँ सलाम मेरे इंतजार में बेचैन,
तेरी उन आंखों को।
सिर मेरा अपनी गोदी में रख,
अपलक जागकर बिताई उन रातों को।
तेरी ममता का मोल कोई हो नहीं सकता।
ज़रा सी खरोच भी कलेजे के टुकड़ों को आ जाए तो,
मन तेरा चैन से सो नहीं नहीं सकता।
रिश्ते हजारों मिल जाए इस दुनिया मगर,
माँ तेरे जैसा कोई,
हो नहीं सकता।
हो नहीं सकता!
हो नहीं सकता!
मंगलवार, 16 मई 2023
रूठने का मज़ा
छोड़िए, रखा क्या है!
दुनिया को समझने और समझाने में!
बस खुलकर मुस्कुराइए,
पैसे नहीं लगते मुस्कुराने में।
बहुत नाजुक होते हैं,रिश्ते, संभालकर रखिए।
वक्त नहीं लगता टूट जाने में।
रूठना , मनाना तो खुशनुमा ज़िंदगी का हिस्सा है,
कोई मजा लेता है मनाने का,
किसी को आता है मज़ा रूठ जाने में।
शनिवार, 13 मई 2023
शुक्रवार, 12 मई 2023
रोने वाले को थोड़ा हंसा दीजिए
गिरने वाले को बढ़कर, उठा लीजिए।
रोने वाले को थोड़ा हँसा दीजिए।
मुश्किलें राह की न कभी होंगीं कम।
इन राहों को अपना बना लीजिए।
हौंसला कोई देगा, हँसेगा कोई।
हँसने वालों को हँसकर भुला दीजिए।
हमको समझे जो, बांटे हमारे जो ग़म।
उसको आँखो में अपनी बसा लीजिए।
चाहे आंसू मिले,या मिले हर खुशी।
दिल से अपने सभी को दुआ दीजिए
रविवार, 7 मई 2023
औरों के नाम करता हूं
ज़िंदगी का हर पल औरों के नाम करता हूं।
अपने लिए नहीं, दूसरों की खुशियों के लिए,
हर काम करता हूं।
कौन,क्या समझता हैं ,इसकी फिक्र नहीं मुझे।
मैं तो अपना हर दिन, सिर्फ इंसानियत के नाम करता हूं।
धन,दौलत या शोहरत की चाह नहीं मुझको।
जो अब तक मिला है ख़ुदा से मुझको,
मैं उसे भी औरों के नाम करता हूं।
जो साथ हैं मेरे और नहीं भी।
मैं सबको सलाम करता हूं।
चाहे हबीब हो या रकीब,खुश रहे हर कोई।
मैं दुआ यहीं ख़ुदा से सुबह शाम करता हूं।
सुबह शाम करता हूं।
सुबह शाम करता हूं।
शुक्रवार, 5 मई 2023
हर शख्स हो हम सा , ये ज़रूरी तो नहीं,इसी उम्मीद में हर शख़्स तन्हा रह गया। इजाज़त महज़ कुछ लोगों को ही थी, मगर हर कोई हमसे, जाने क्या-क्या कह गया। पूछा गुलों से हमने,,तुम्हे कांटों से डर नहीं लगता? मेरे सवाल पर हर गुल,सिर्फ हँसकर रह गया। धार तो बहुत तेज़ होती है, ज़िंदगी के दरिया की। जो हँसा वही रह गया, और जो रोया, यूं ही बह गया।
गुरुवार, 4 मई 2023
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