ये दौलत,ये इल्म, ये शोहरत।
ये सब धरा रह जाएगा।
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
न रिश्ते,न नाते, न दिलकश वो बातें।
सब यहीं छूट जाएगा,
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
न खुशियाँ,न ग़म, न ज्यादा, न कम।
ये सब झमेला ख़त्म हो जाएगा।
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
न इसका, न उसका, हुआ जग ये किसका?
तू ये सब जान जाएगा,
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
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