शब्द ही ब्रह्म है। यही सृष्टि का आधार है।
शब्दों का दिल तोड़ देने वाला प्रयोग जितना आसान है,
शब्दों का दिल छू लेने वाला प्रयोग उतना ही मुश्किल।
बिना कुछ पाने की इच्छा रखे,सबका भला चाहने का भाव रखना अत्यंत कठिन कार्य है। ईश्वर की कृपा के बिना यह दैवीय भाव प्राप्त नहीं होता।
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दिल किसी का मत दुखाना, दिल में खुदा रहता है।
मंजिल तो सबकी एक है, बस रास्ता जुदा रहता है।
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