JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

सोमवार, 22 मई 2023

बनकर चराग औरों के लिए जलते रहे।कहां जाना है कुछ ख़बर ही न रही,बस चलते रहे...चलते रहे.... चलते रहे।हमने वजूद अपना, अपनों में शामिल कर दिया।और अपने हमें,बस छलते रहे...छलते रहे..छलते रहे।

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