JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

रविवार, 30 अप्रैल 2023

कहने वालों की कौन सुनता है?
करने वालों की सुनो तो कोई बात बने।
हँसने वालों की कौन सुनता है?
हँसाने वालों की सुनो,तो कोई बात बने।
चुभने वालों की कौन सुनता है?
लफ्ज़ मरहम की तरह हों,तो कोई बात बनें।
अपनी- अपनी ही कहने वालों की कौन सुनता है?
दर्द औरों का भी सुनो, तो कोई बात बनें।
दौलत ओ शोहरत पे मरने वालों,की कौन सुनता है?
गुमां को छोड़कर जियो तो कोई बात बनें।

बुधवार, 26 अप्रैल 2023

खुद को तलाशते रहे दुनिया में,और तलाश खुद ही पर खत्म हुई।ज़िंदगी भर तरसते रहे,जिंदगी के लिए।अब मिली है तो,लगभग खत्म हुई।खरीदने निकले थे, दौलत से हर खुशी।ज़रा सी खुशी भी हासिल न कर सके, सारी दौलत से,मगर इस तलाश में,खुशियाँ भी, दौलत भी, और ज़िंदगी भी ख़त्म हुईं।

ऐसा नहीं कि, पहली बार हो रहा है।कि तू भी मुश्किलों का शिकार हो रहा है।ज़िंदगी का तो मुश्किलों से, रिश्ता बहुत पुराना है। सिर्फ तू ही नहीं , मुश्किलों से दो चार हो रहा है। जो मिला वो ख़ुदा की रहमत है, जो नहीं, वो तेरा मुकद्दर है। जो है नहीं क्यों उसका, इंतजार हो रहा है।

शनिवार, 22 अप्रैल 2023

सिर्फ़ कह देने से कोई दोस्त नहीं हो जाता।दोस्ती हर हाल में साथ निभाने का नाम है।ज़रूरी नहीं कि आसमां से सितारे ही तोड़े जाएं।आसमां की बुलंदियों का रास्ता दिखाना भी तो,एक दोस्त का ही काम है।बड़ी किस्मत से मिलते हैं,दोस्त फरिश्तों से।ऐसे दोस्तों से ही जिंदा, आज दोस्ती का नाम है।

क्या माँगू मैं अपने लिए ख़ुदा से,बिन माँगे ही उसने बहुत कुछ दे दिया है।शायद किस्मत में भी नहीं था उतना,जितना उसने दामन मेरा भर दिया है।

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2023

नहीं चाहता कि बदले में मुझे कुछ मिले।
बस थोड़ी सी कोशिश है मेरी,
हर चेहरा फूल सा खिले।
यही दुआ है हमेशा ऊपर वाले से,
कभी किसी से भी न हों, शिकवे या गिले।
दामन इतना तो भरना मेरा भी ए ख़ुदा!,
औरों के कुछ तो काम आए,
 जो भी सौगात ज़िंदगी में तुझसे मिले।

मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

Khushi Vo hai jo

खुशी वो है जो,
दूसरों की मुस्कुराहट से मिलती है।
क्यों खोजते हो बाहर?,
खुशी की कली तो,
मन के किसी कोने में ही खिलती है।
रखा  क्या है सिर्फ़ अपने लिए जीने में?
खुशियों की बारिश शुरू हो जाती है,
जब यह सोच बदलती है।

कुछ पाने की उम्मीद नहीं,कुछ खोने का ग़म नहीं।जो दिया अभी तक ऊपर वाले ने,वो इतना भी कम तो नहीं?

सोमवार, 17 अप्रैल 2023

ज़िंदगी में कभी दिन, होती कभी रात है।
 जिंदगी का हर पल, ख़ुदा की सौगात है।
 चेहरे पर हर हाल में खुशी कायम रखिए।
 नहीं समझेगा कोई, जो तेरे दिल में जज़्बात हैं।

रविवार, 16 अप्रैल 2023

हमने देखा है वो मंजर

हमने देखा है, वो मंज़र।
जब अपनों के ही हाथ में था,खंजर।
सभी अपने, बेगानों में शामिल होते रहे।
अपनों के इंतज़ार में हम,अपनों को ही खोते रहे।
दरख़्त से पत्ते क्या उड़े,
पंछियों ने भी आशियाना छोड़ दिया।
वक्त बदलते ही,वक्त ने,
ज़िंदगी का रुख मोड़ दिया।
कांटों पे चलते रहे,
मखमली राहों की उम्मीद न थी।
ग़मों में इतने खो गए कि,  
होठों पे हँसी की उम्मीद न थी।
फिर ख़ुदा की रहमत ने, 
अंधेरों में रौशनी भर दी।
खुशियों से भर दिया दामन,
 और ग़मों में कमी कर दी।
मगर हमने कभी गुमां न किया,
रौशनी भी औरों के नाम कर दी....
रौशनी भी औरों के नाम कर दी....
रौशनी भी औरों के नाम कर दी

मंगलवार, 11 अप्रैल 2023

क्या जिंदगी है तेरी?
अगर, तेरे जाने के बाद किसी की आँखों में नमी तक न हो?
तूने क्या कमाया?
अगर , तेरे जाने बाद, तेरे लिए दो ग़ज़ ज़मीं तक न हो।
क्या फायदा ?
हजारों नौकर- चाकर,गाड़ी , बंगले और रिश्तों का?
अगर, तेरी सांस उखड़ते वक्त,तेरी आह किसी ने सुनी तक न हो।
गुजारों अपनी ज़िंदगी ऐसे,
कि दुनिया से रुखसत के वक्त,
नम हों बेशुमार आँखें,
लोग इतने तेरे साथ चलें,
कि पांव रखने की ज़मीं तक न हो।


चलो अब से बिना मतलब जिया जाए।अपने लिए बहुत किया,अब कुछ औरों के लिए किया जाए।जल-जल के राख बहुत हो लिए,लोगों की खुशियों से।अब चरागों सा जलकर, दूसरों के अंधेरों को रौशन किया जाए।

बिना मतलब जीने का,मतलब ही कुछ और होता है।किसी की राह के कांटे चुन लेने का, मतलब ही कुछ और होता है।यूं तो लोगों को, दूसरों के ग़म पे हँसने की आदत है।ख़ुद अपनी कमियों पे हँसने का,मतलब ही कुछ और होता है।

नज़रों की इनायत से,कमियाँ नहीं छुपती।
वक्त पहचानो,दुनिया के साथ चलो,
ये दुनिया किसी के लिए नहीं रुकती।
ख़ुद में हौंसला, इल्म और तजुर्बा कायम रखो।
खुशामद से मिली तरक्की, ज्यादा देर तक नहीं टिकती।

सोचा था नहीं जाऊंगा,

सोचा था नहीं जाऊंगा,
मगर जाना पड़ा।
जो हो गया था उसको,
भुलाना पड़ा।
वो चल रहा था साथ,
मगर दिल से दूर था।
दिल के करीब,
फिर से उसे लाना पड़ा।
उसकी ख़ामोशी नस्तर सी चुभ रही थी।
शायद वो कुछ बोले,मुझे पुकारना पड़ा।
उसकी आँखों से आंसू सा बह रहा था मैं।
कहीं ख़त्म न हो जाऊं मैं,
उसे चुप कराना पड़ा।

रविवार, 9 अप्रैल 2023

पत्ते दरख़्त पर नहीं टिकते सूख जाने के बाद।
रिश्ते बहुत मुश्किल से जुड़ते हैं,टूट जाने के बाद।
ज़िंदगी बिना सपनों के कट सकती है,
बिना अपनों के नहीं।
साथ अपनों का नहीं मिलता,
 छूट जाने के बाद।

शनिवार, 8 अप्रैल 2023

कोई आएगा, इस इंतजार में क्यों बैठे हो?
कोई चाहेगा,बेकरार से क्यों बैठे हो?
इतना आसां नहीं,आँखों में किसी की बसना।
क्यों सरे राह यूं आँखेँ बिछाए बैठे हो?
हुस्न वाले हवा से होते हैं।
क्यों उनके सामने दीपक जलाए बैठे हो?
ये आसमां ही आफताब का ठिकाना है।
ज़मीं पे ये कभी तो उतरेगा,
इस इंतजार में क्यों बैठे हो?

बहुत रुलाया है दुनिया ने, कोई बात नही।चलो, सब भूलकर, दुनिया को हँसाया जाए।तोड़ने वालों ने तोड़ा है, कोई बात नही।चलो अब आशियां को फिर से बनाया जाए।चराग बुझ गया हवा से कोई बात नही।हर इक चराग को अब फिर से जलाया जाए।लफ्ज़-ओ-अल्फाज़ में जज़्बात अब नहीं मिलते।लफ्ज़-ओ-अल्फाज़ को जज्बातों से मिलाया जाए।चल पड़ा फिर कोई शायद तन्हा।चलो उस शख़्स को अपनों से मिलाया जाए।सिसकियाँ ले रहा शायद कोई।चलो उसके लिए सपनों को सजाया जाए।मिले हर राह में काँटे मुझको।चलो हर राह को फूलों से सजाया जाए।बिखर-बिखर गया हर बार ,फिर नहीं संवरा।चलो अब ज़िंदगी को फिर से संवारा जाए।

लफ्ज़ मरहम,लफ्ज़ नस्तर, लफ्ज़ हौंसला भी होते हैं।लफ्ज़ से लोग मिलते हैं और लफ्ज़ से ही जुदा भी होते हैं।

लोग साथ आएंगे ये जरूरी तो नहीं।
मुश्किल सफ़र में हर किसी से,
ये उम्मीद लगाना अच्छा नहीं होता।
हर सोच आपकी सोच का आईना बन जाएगी।
ऐसी खुशफहमी में जीना भी अच्छा नहीं होता।
आफताब,महताब और सितारों से रौशनी की उम्मीद पर।
चराग जलाना ही छोड़ देना अच्छा नहीं होता।

गुरुवार, 6 अप्रैल 2023

दिल के सुकून के लिए...

कुछ काम शोहरत नहीं, दिल के सुकूं के लिए होते हैं।
जिसको समेटना हो समेटे दौलत।
हम तो अपने नहीं, औरों के लिए सपने संजोते हैं।

बुधवार, 5 अप्रैल 2023

नफरत से जीत सकते हो सिर्फ दुनिया, 
 किसी का दिल नहीं।
 
 नफरती आँखों के आंसुओं में,
  होता कोई शामिल नहीं।
  
  खुद को कुछ भी समझे,
  दौलत ए गुमां में जीने वाला।
अंजाम- ए- ज़िंदगी उसे,
 होता कुछ भी हासिल नहीं।
नफरत से दुनिया जीत सकते हो किसी का दिल नहीं।
 दौलत से बेशुमार मकां बना सकते हो,
  मगर घर नहीं।
  क्योंकि घर मुहब्बत से बनते है,
  दौलत से सिर्फ़ ईंट पत्थरों के मकां ही बनाए जा सकते हैं।

लोग लोगों को नहीं , 
सिर्फ इंसान और इंसानियत को
याद रखते हैं।
 लोग आपके पद को नहीं,
 ऊँचे कद को याद रखते हैं।

लोग आपके खाने को नहीं,
उसमें मिली मुहब्बत को याद रखते हैं।
लोग आपके मिलने को नहीं,
आपसे मिलने से हुई खुशी को याद रखते हैं।
लोग आपके साथ को नहीं,
आपके साथ से मिले अपनेपन को याद रखते हैं।
लोग आपकी शक्ल -ओ- सूरत को नहीं,
आपकी फितरत को याद रखते हैं।
लोग आपके ब्रांडेड कपड़ों को नहीं,
उसमें ढकी शख्सियत को याद करते हैं।

लोग आपकी दौलत को नहीं,
उसकी बदौलत मिली खुशियों को याद रखते हैं।

लोग आपकी हर बात को नहीं,
आपके जज़्बात को याद रखते हैं।

लोग आपकी नज़रों को नहीं,
आपके नज़रिए को याद रखते हैं।

लोग आपके हँसने को नहीं,
आपके हँसने से मिले,
खुशी और ग़म को याद रखते हैं।

लोग आपके गिरने को नहीं,
गिरकर संभलने को याद रखते हैं।

लोग आपके इल्म को नहीं,
आपके तजुर्बे को याद रखते हैं।

लोग आपकी तालीम को नहीं,
आपकी शख्सियत को याद रखते हैं।

लोग आपके चलने की नज़ाकत को नहीं,
किसी को उठाने के लिए बढ़े दो कदमों को याद रखते हैं।

मंगलवार, 4 अप्रैल 2023

सूरज का आना और जाना तय है।
 ग़म के बाद मुस्कुराना तय है।
अंधेरे से घबरा मत ए दोस्त!
सुबह का आना  तय है।
ज़माने की बातों पे न जा,
इसकी तो आदत है बोलना,
सिर्फ़ अपने मकसद पे लग जा,
तेरा वक्त भी आना तय है।

रविवार, 2 अप्रैल 2023

बोलने वालों को बोलने दीजिए,काम अपना करते जाइए।नजरंदाज करके राहों के काँटे,अपनी मंज़िल की ओर बढ़ते जाइए।हँसने वालों का काम ही है हँसना,उनके हँसने पर न जाइए।कुछ लोग हँसकर ही हमारा हौसला बढ़ाते हैं,आप भी हँसिए और आगे बढ़ते जाइए।जो ख़ुद कुछ कर न सके,वे क्या औरों की राह में फूल बिखराएंगे?काम उनका करने दीजिए उनको,आप बस मकसद में अपने लग जाइए।

बोलने वालों को बोलने दीजिए,
काम अपना करते जाइए।
नजरंदाज करके राहों के काँटे,
अपनी मंज़िल की ओर बढ़ते जाइए।
हँसने वालों का काम ही है हँसना,
उनके हँसने पर न जाइए।
कुछ लोग हँसकर ही हमारा हौसला बढ़ाते हैं,
आप भी हँसिए और आगे बढ़ते जाइए।
जो ख़ुद कुछ कर न सके,
वे क्या औरों की राह में फूल बिखराएंगे?
काम उनका करने दीजिए उनको,
आप बस मकसद में अपने लग जाइए