नफरत से दुनिया जीत सकते हो किसी का दिल नहीं।
दौलत से बेशुमार मकां बना सकते हो,
मगर घर नहीं।
क्योंकि घर मुहब्बत से बनते है,
दौलत से सिर्फ़ ईंट पत्थरों के मकां ही बनाए जा सकते हैं।
लोग लोगों को नहीं ,
सिर्फ इंसान और इंसानियत को
याद रखते हैं।
लोग आपके पद को नहीं,
ऊँचे कद को याद रखते हैं।
लोग आपके खाने को नहीं,
उसमें मिली मुहब्बत को याद रखते हैं।
लोग आपके मिलने को नहीं,
आपसे मिलने से हुई खुशी को याद रखते हैं।
लोग आपके साथ को नहीं,
आपके साथ से मिले अपनेपन को याद रखते हैं।
लोग आपकी शक्ल -ओ- सूरत को नहीं,
आपकी फितरत को याद रखते हैं।
लोग आपके ब्रांडेड कपड़ों को नहीं,
उसमें ढकी शख्सियत को याद करते हैं।
लोग आपकी दौलत को नहीं,
उसकी बदौलत मिली खुशियों को याद रखते हैं।
लोग आपकी हर बात को नहीं,
आपके जज़्बात को याद रखते हैं।
लोग आपकी नज़रों को नहीं,
आपके नज़रिए को याद रखते हैं।
लोग आपके हँसने को नहीं,
आपके हँसने से मिले,
खुशी और ग़म को याद रखते हैं।
लोग आपके गिरने को नहीं,
गिरकर संभलने को याद रखते हैं।
लोग आपके इल्म को नहीं,
आपके तजुर्बे को याद रखते हैं।
लोग आपकी तालीम को नहीं,
आपकी शख्सियत को याद रखते हैं।
लोग आपके चलने की नज़ाकत को नहीं,
किसी को उठाने के लिए बढ़े दो कदमों को याद रखते हैं।