JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

रविवार, 30 अप्रैल 2023

कहने वालों की कौन सुनता है?
करने वालों की सुनो तो कोई बात बने।
हँसने वालों की कौन सुनता है?
हँसाने वालों की सुनो,तो कोई बात बने।
चुभने वालों की कौन सुनता है?
लफ्ज़ मरहम की तरह हों,तो कोई बात बनें।
अपनी- अपनी ही कहने वालों की कौन सुनता है?
दर्द औरों का भी सुनो, तो कोई बात बनें।
दौलत ओ शोहरत पे मरने वालों,की कौन सुनता है?
गुमां को छोड़कर जियो तो कोई बात बनें।

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