JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

अपने अपने नहीं गैरों की बात रहने दो

अपने, अपने नहीं गैरों की बात रहने दो।
कोई समझे कि नहीं, दिल की बात कहने दो।

कल थे जिनके लिए हम रौनक ए महफिल की तरह।
आज हम हो गए उनके लिए, पत्थर की तरह।
उनकी आंखों में न आसूं, कभी आने पाएं।
अश्क आंखों से मेरी बहते हैं तो बहने दो।

हमने अपनों के लिए, ग़म हैं बेशुमार सहे।
वक्त बदला तो ये अपने, मेरे अपने न रहे।
कोई पागल कहे, मुझको तो आज कहने दो।
अपने,अपने नहीं गैरों की बात रहने दो....


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