तुमने कितनों का दिल दुखाया?
तुमने कितनों के जख्मों पर मरहम रखा?
तुमने कितनों की जिंदगी को खुशियों से रौशन किया?
तुमने कितनों की जिंदगी को अंधेरे में ढकेल दिया?
तुमने कितने लोगों के ग़म को अपनाकर बदले में उनकी जिंदगी को खुशियों से भर दिया?
अपनी जिंदगी में तुमने क्या खोया और क्या पाया?
इंसान इन सवालों के जवाब ढूंढ़ता रह जाता है और जिंदगी अलविदा कहकर रुखसत हो जाती है। इसलिए
हर दिन सुबह की शुरुआत में कहिए :
"हे ईश्वर! आपकी कृपा से मुझे आज का शुभ दिन मिला है। अपनी कृपा मुझपर बनाए रखना। मेरी वाणी, मेरे व्यवहार से किसी को भी कोई ठेस न पहुंचे।"
रात को सोते समय कहिए :
" हे परमेश्वर! आज आपकी कृपा प्राप्त हुई इसके लिए आपका धन्यवाद। यदि जाने अंजाने आज मुझसे किसी के दिल को ठेस पहुंची हो तो अज्ञानी समझकर मुझे क्षमा करना।"
ईश्वर परम दयालु है। वो हम पर अपनी नज़र और कृपा सदैव बनाए रखता है। हम उसे भूल जाएं लेकिन वो हमे कभी नहीं भूलता।
......Surendra Kumar.....
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