मेरे गीत, मेरी ग़ज़लें
JAGJIT SINGH
GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
मंगलवार, 28 मार्च 2023
जो हँसते थे कभी दूसरों के ग़म पर,
आज अपने घर के किसी कोने में,
अपनी हँसी तलाश रहे हैं।
जो शोहरत के गुमां में चूर थे कभी,
घर के आईने में आज ख़ुद को तलाश रहे हैं।
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