JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2023

दिल इतना तो खुला रखना कि, चार कांधों का साथ मिल जाए। बाद जाने के तेरे, न ये ज़माना मुस्कुराए।

दिल इतना तो खुला रखना कि,
 चार कांधों का साथ मिल जाए। 
बाद जाने के तेरे, न ये ज़माना मुस्कुराए।

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