JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

मंगलवार, 16 मई 2023

रूठने का मज़ा

छोड़िए, रखा क्या है!
दुनिया को समझने और समझाने में!
बस खुलकर मुस्कुराइए,
पैसे नहीं लगते मुस्कुराने में।
बहुत नाजुक होते हैं,रिश्ते, संभालकर रखिए।
वक्त नहीं लगता टूट जाने में।
रूठना , मनाना तो खुशनुमा ज़िंदगी का हिस्सा है,
कोई मजा लेता है मनाने का, 
किसी को आता है मज़ा रूठ जाने में।

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