छोड़िए, रखा क्या है!
दुनिया को समझने और समझाने में!
बस खुलकर मुस्कुराइए,
पैसे नहीं लगते मुस्कुराने में।
बहुत नाजुक होते हैं,रिश्ते, संभालकर रखिए।
वक्त नहीं लगता टूट जाने में।
रूठना , मनाना तो खुशनुमा ज़िंदगी का हिस्सा है,
कोई मजा लेता है मनाने का,
किसी को आता है मज़ा रूठ जाने में।
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