शब्दों की महिमा अनंत है।
शब्द ही भविष्य की दशा और दिशा तय करते हैं।
शब्द रिश्ते जोड़ते हैं, शब्द ही रिश्ते तोड़ते भी हैं।
शब्द ही सुकून देते हैं, शब्द ही बेचैनी भी देते हैं।
शब्द ही दवा, दुआ और अमृत है, शब्द ही विष भी है।
शब्द ही भोजन को स्वादिष्ट बनाता है।
शब्द ही स्वादिष्ट पकवान को भी बेस्वाद बनाता है।
शब्द ही महाभारत करवा सकता है।
शब्द ही कालिदास बना सकता है।
शब्द ही तुलसीदास भी बना सकता है।
शब्द ही सम्मान दिलाता है।
शब्द ही अपमान भी दिलाता है।
अगर दिल से निकले आत्मा को परमात्मा से भी मिलाता है।
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