JAGJIT SINGH
- GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
हौसला तोड़ने वालों से दूर ही रहिए। खुद को कोसने वालों से दूर ही रहिए। कुछ लोग हैं, गिरते मकां में रहने के आदी। आप ऐसे मकानों से दूर ही रहिए। धीरे धीरे रंग लाता है,सोहबत का असर। आदमी हमनशीं के ही रंग में रंग जाता है। हमनशीं अच्छा हो तो चलते रहिए, हमनशीं राह भुलाए तो दूर ही रहिए।
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