तुमको क्या मिला,मायने यह नहीं रखता।
तुमने क्या दिया,ज़माना इसी से चलता है।
सूरज ने भी कभी, अपनी धूप का हिसाब नहीं रखा।वो तो सारे जहां के लिए जलता है।
रोज निकलता है, रोज ढलता है।
रिश्ते रंग बदलते हैं,ज़माना भी रंग पर रंग बदलता है।उस चराग़ की रौशनी कभी कम नहीं होती,
जो अपने अंधेरों को भूलकर,लोगों के लिए जलता है।
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