JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

रविवार, 5 मार्च 2023

कोई ना खुदा खुदा को भूलकर अपनी कश्ती को खुद डुबो रहा है।आफताब जिंदगी का सिर पर आ चुका है,और तू अभी तक सो रहा है?

कोई ना खुदा खुदा को भूलकर अपनी कश्ती को खुद डुबो रहा है।आफताब जिंदगी का सिर पर आ चुका है,और तू अभी तक सो रहा है?

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