JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

मंगलवार, 11 अप्रैल 2023

क्या जिंदगी है तेरी?
अगर, तेरे जाने के बाद किसी की आँखों में नमी तक न हो?
तूने क्या कमाया?
अगर , तेरे जाने बाद, तेरे लिए दो ग़ज़ ज़मीं तक न हो।
क्या फायदा ?
हजारों नौकर- चाकर,गाड़ी , बंगले और रिश्तों का?
अगर, तेरी सांस उखड़ते वक्त,तेरी आह किसी ने सुनी तक न हो।
गुजारों अपनी ज़िंदगी ऐसे,
कि दुनिया से रुखसत के वक्त,
नम हों बेशुमार आँखें,
लोग इतने तेरे साथ चलें,
कि पांव रखने की ज़मीं तक न हो।


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