JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

सोमवार, 6 फ़रवरी 2023

जुबां खामोशियों की, लफ्जों की मोहताज़ नहीं होती...

जुबां खामोशियों की, लफ्जों की मोहताज़ नहीं होती।
  रुख़ की सिलवटों से जो बात निकल जाती है-2
 लफ्जों-अल्फाजों से वो बात नहीं होती।
  

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