JAGJIT SINGH
- GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
नजरों में उतरने के लिए,न जाने कितने लम्हें गुज़र जाते हैं।मगर नजरों से उतरने के लिए,महज़ एक लम्हा ही काफ़ी है।नज़र में उतरे शख्स ही,हमारी नज़रों में ही नहीं, हमारे दिल में भी रहते हैं। नजरों से उतरे शख्स से, आईने भी दूर रहते हैं। .........Surendra Kumar.......
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