ज़िंदगी का हर पल औरों के नाम करता हूं।
अपने लिए नहीं, दूसरों की खुशियों के लिए,
हर काम करता हूं।
कौन,क्या समझता हैं ,इसकी फिक्र नहीं मुझे।
मैं तो अपना हर दिन, सिर्फ इंसानियत के नाम करता हूं।
धन,दौलत या शोहरत की चाह नहीं मुझको।
जो अब तक मिला है ख़ुदा से मुझको,
मैं उसे भी औरों के नाम करता हूं।
जो साथ हैं मेरे और नहीं भी।
मैं सबको सलाम करता हूं।
चाहे हबीब हो या रकीब,खुश रहे हर कोई।
मैं दुआ यहीं ख़ुदा से सुबह शाम करता हूं।
सुबह शाम करता हूं।
सुबह शाम करता हूं।
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