मेरे गीत, मेरी ग़ज़लें
JAGJIT SINGH
GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
सोमवार, 6 फ़रवरी 2023
चांद का नूर
चांद का नूर, बहुत दूर, बहुत दूर तक बिखरता है।
ये कोई चराग़ नहीं, जो कभी भी ढल जाए।
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