JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

गुरुवार, 25 जनवरी 2024

dekhi har kisi ne

देखी हर किसी ने रौशनी चराग की,

उसका जलना किसी ने नहीं देखा।

गिर रहा था तो दुनिया की थी नज़र,

मेरा संभलना किसी ने नहीं देखा।

मेरे हंसने पर हंसती रही दुनिया।

मेरा सिसकना किसी ने नहीं देखा।

समंदर आंखों का, देखती रह गई ये दुनिया।

उनका बहना किसी ने नहीं देखा।