मेरे गीत, मेरी ग़ज़लें
JAGJIT SINGH
GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
शनिवार, 4 फ़रवरी 2023
महफिल ए दुनिया में आदमी क्यों तन्हा है,....,
महफिल ए दुनिया में, आदमी क्यों तन्हा है।
जिंदगी के मेले में, आदमी क्यों तन्हा है?
घिरा है रिश्तों से मगर, फिर भी क्यों तन्हा है?
दोस्त है, दुश्मन है, हबीब ओ रकीब भी हैं।
सिसकियां लेता हुआ, आदमी क्यों तन्हा है?
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