JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

शनिवार, 4 मार्च 2023

माँ के आंसू, पिता की तकलीफों का,तू ये क्या सिला दे रहा है?जिसने तेरे पाँव के नीचे,कभी खुद को बिछा दिया था-2आज उन्हीं को तू, वृद्धाश्रम जाने की सज़ा दे रहा है

माँ के आंसू, पिता की तकलीफों का,
तू ये क्या सिला दे रहा है?
जिसने तेरे पाँव के नीचे,
कभी खुद को बिछा दिया था-2
आज उन्हीं को तू, वृद्धाश्रम जाने की सज़ा दे रहा है

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