JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

शुक्रवार, 3 मार्च 2023

जिंदगी जीना सिखाती रही।कभी हँसाती,कभी रुलाती रही।लोग, कदम दर कदम मिलते रहे।लोग बढ़ते रहे,इंसान घटते रहे।घर सिमटते गए, दूरियां बढ़ती रहीं।दौलत ओ शोहरत के साथ,जज़्बातों के बाजार सजते रहे।फिर भी जिंदगी अपनी ही धुन में, गुनगुनाती रही।हम रिश्तों को और ,जिंदगी हमें आजमाती रही।............. Surendra Kumar......

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