JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

रविवार, 26 फ़रवरी 2023

जो हमारे पास है अभी, मुश्किल में वही काम आता है।कहने को तो समंदर में पानी है बहुत-2पर क्या ये समंदर, किसी की प्यास बुझाता है?.................Surendra Kumar................

हालात जिंदगी में कैसे भी आ जाएं,हौंसला बनाए रखिए।खुद पर यकीन ही तेरी असल मिल्कियत है,यकीन खुद पर मेरे दोस्त बनाए रखिए।

हालात जिंदगी में कैसे भी आ जाएं,
हौंसला बनाए रखिए।
खुद पर यकीन ही तेरी असल मिल्कियत है,
यकीन खुद पर मेरे दोस्त बनाए रखिए।

शनिवार, 25 फ़रवरी 2023

हर सुबह इक नया पैगाम लाती है।सूर्य की हर किरण,रंगों को भर जाती है।

हर सुबह इक नया पैगाम लाती है।सूर्य की हर किरण,रंगों को भर जाती है।

है आफताब हमसे :नहीं जलता किसी को जलाने के लिए।मैं तो जलता हूं सारे ज़माने के लिए।इसलिए मेरी चमक सदियों से बरकरार है,क्योंकि मुझे खुद से भी ज्यादा,सारे जहां से प्यार है। *आफताब : सूर्य

 है आफताब हमसे :
नहीं जलता किसी को जलाने के लिए।
मैं तो जलता हूं सारे ज़माने के लिए।
इसलिए मेरी चमक सदियों से बरकरार है,
क्योंकि मुझे खुद से भी ज्यादा,
सारे जहां से प्यार है।

               *आफताब : सूर्य

दौलत-ओ-शोहरत के पीछे, इंसान इंसान को भूल गया।अपनी हस्ती के गुमां में, रिश्ते तो रिश्ते,खुदा को भी भूल गया?

दौलत-ओ-शोहरत के पीछे,
 इंसान इंसान को भूल गया।
अपनी हस्ती के गुमां में,  
रिश्ते तो रिश्ते,
खुदा को भी भूल गया?

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023

जिंदगी और मुश्किलों का रिश्ता बहुत पुराना है।जो मुश्किलों में भी मुस्कुराना जानते हैं -2,उन्हे जिंदगी से अभी बहुत कुछ पाना है। जो मिलना है मिल ही जाएगा। पतझड़ में भी फूल खिल ही जाएगा। बस जिंदगी हँसकर बिताना है। जो बात सिर्फ मुस्कुराने की करते हैं, उन्हे ही याद रखता, ये ज़माना है।............Surendra Kumar...............

जिंदगी और मुश्किलों का रिश्ता बहुत पुराना है।
जो मुश्किलों में भी मुस्कुराना जानते हैं -2,
उन्हे जिंदगी से अभी बहुत कुछ पाना है।
 जो मिलना है मिल ही जाएगा।
 पतझड़ में भी फूल खिल ही जाएगा।
 बस जिंदगी हँसकर बिताना है।
 जो बात सिर्फ मुस्कुराने की करते हैं,
 उन्हे ही याद रखता, ये ज़माना है।
............Surendra Kumar...............

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2023

ये मात्र एक शब्द नहीं बल्की जीवन का सार है।एक बच्चे के लिए तो ये सारा संसार है।एक "माँ" ही तो है जो शब्दों से परे , चेहरे को भावों को पढ़ना जानती है। नौनिहाल के रुदन के रूपों को, अर्थ देना जानती है। खुद गीले में ठिठुरकर, कलेजे के टुकड़े को , परियों की नगरी में घुमाना जानती है। ये "माँ" ही तो है जो 'भूख नहीं' कहकर,अपना निवाला बच्चों को देना जानती है।ये "माँ" ही तो है जो काला टीका लगाकर,बुरी नज़र से बचाना जानती है।ये "माँ" ही तो है जो बच्चे की छोटी सी सिसकार पर,रात - रात भर जागना जानती है।सारा संसार रूठ जाए , चाहे हर सुख छूट जाए,लेकिन ये "माँ" ही तो है जो अपने बच्चों से,रूठना ही नहीं जानती है।इसीलिए धरती को भी शायद माँ ही कहते हैं,जो सबकुछ सहकर, कुछ लेना नहीं, सिर्फ देना जानती है। .......... Surendra Kumar..........

ये मात्र एक शब्द नहीं बल्की जीवन का सार है।
एक बच्चे के लिए तो ये सारा संसार है।
एक "माँ" ही तो है  जो शब्दों से परे ,
 चेहरे को भावों को पढ़ना जानती है।
 नौनिहाल के रुदन के रूपों को, अर्थ देना जानती है।
 खुद गीले में ठिठुरकर, कलेजे के टुकड़े को ,
 परियों की नगरी में घुमाना जानती है।
 ये "माँ" ही तो है जो 'भूख नहीं' कहकर,
अपना निवाला बच्चों को देना जानती है।
ये "माँ" ही तो है जो काला टीका लगाकर,
बुरी नज़र से बचाना जानती है।
ये "माँ" ही तो है जो बच्चे की छोटी सी सिसकार पर,
रात - रात भर जागना जानती है।
सारा संसार रूठ जाए , चाहे हर सुख छूट जाए,
लेकिन ये "माँ" ही तो है जो अपने बच्चों से,
रूठना ही नहीं जानती है।
इसीलिए धरती को भी शायद माँ ही कहते हैं,
जो सबकुछ सहकर, कुछ लेना नहीं, सिर्फ देना जानती है।

   .......... Surendra Kumar..........



 
 
 
 
 
 
 

जो हमेशा मुस्कुराना जानते हैं।वो रिश्तों को संजोना जानते हैं।उनके लिए वजूद उनका मायने नहीं रखता।जो अपनो को ही सबकुछ मानते है।

जो हमेशा मुस्कुराना जानते हैं।वो रिश्तों को संजोना जानते हैं।उनके लिए वजूद उनका मायने नहीं रखता।जो अपनो को ही  सबकुछ मानते है।

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2023

वक्त हर पल का हिसाब लेता है।देता है तो बेहिसाब देता है,लेता है तो बेहिसाब लेता है।गुमां न कर तू अपनी शोहरत पर -2वो ही पल में खिताब देता है, वो ही पल में खिताब लेता।*वो ही : ईश्वर

वक्त हर पल का हिसाब लेता है।
देता है तो बेहिसाब देता है,लेता है तो बेहिसाब लेता है।
गुमां न कर तू अपनी शोहरत पर -2
वो ही पल में खिताब देता है, वो ही पल में खिताब लेता।

*वो ही : ईश्वर



सोमवार, 20 फ़रवरी 2023

रूठने वाले तो अपने ही हुआ करते हैं।तू खुशनसीब है, जो तुझसे कोई रूठा है।

रूठने वाले तो अपने ही हुआ करते हैं।तू खुशनसीब है, जो तुझसे कोई रूठा है।

रूठने वाले को मनाने में देर न कर ऐ दोस्त!क्या पता कल वो फिर, मिले न मिले।

जो है तेरी किस्मत में , वो कोई ले नहीं सकता।
जो नहीं तेरे नसीब में,  कोई वो दे नहीं सकता।
डूबने वाले तो, साहिल पे भी, डूब जाते हैं।
जिसकी कश्ती का  ना खुदा खुदा हो।
 उसे समंदर भी डुबो नहीं सकता।

जो है तेरी किस्मत में , वो कोई ले नहीं सकता।जो नहीं तेरे नसीब में, कोई वो दे नहीं सकता।डूबने वाले तो, साहिल पे भी, डूब जाते हैं।जिसकी कश्ती का ना खुदा खुदा हो। उसे समंदर भी डुबो नहीं सकता।

जो है तेरी किस्मत में , वो कोई ले नहीं सकता।
जो नहीं तेरे नसीब में,  कोई वो दे नहीं सकता।
डूबने वाले तो, साहिल पे भी, डूब जाते हैं।
जिसकी कश्ती का  ना खुदा खुदा हो।
 उसे समंदर भी डुबो नहीं सकता।

रविवार, 19 फ़रवरी 2023

मतलबी दुनिया में....


मतलबी दुनिया में, मतलब परस्ती भी शर्मिंदा है।
इंसानियत तोड़ रही दम, सिर्फ इंसान ज़िंदा है।

किसी शै में खुशी तलाश न कर

किसी शख्स किसी शय में खुशी तलाश न कर।
ये दिल की जागीर है, कहां दुनिया में मिलती है?

हर सुबह आपकी खुशनुमा हो।जिंदगी में न ग़म का नामो निशां हो।खुशियां ही खुशियां हो हर तरफ,आप जहां हो... जहां हो.. जहां हो।

हर सुबह आपकी खुशनुमा हो।
जिंदगी में न ग़म का नामो निशां हो।
खुशियां ही खुशियां हो हर तरफ,
आप जहां हो... जहां हो.. जहां हो।

जो लोग वक्त की जमीं पर, अपने कदमों के निशां छोड़ जाते हैं।लेकर जाते हैं वो दुनिया से सारे ग़म, खुशियां और के लिए छोड़ जाते हैं।

जो लोग वक्त की जमीं पर, 
अपने कदमों के निशां छोड़ जाते हैं।
लेकर जाते हैं वो दुनिया से सारे ग़म, 
खुशियां और के लिए छोड़ जाते हैं।

जो लोग वक्त की जमीं पर, 
अपने कदमों के निशां छोड़ जाते हैं।
समेटकर दुनिया जहां के ग़म,
खुशियां और के लिए छोड़ जाते हैं।

लोग क्या सोचेंगे इसकी चिंता उतनी ही कीजिए जिससे आपकी जिंदगी में खलल न पड़े। क्योंकि लोग आपके हिसाब से नहीं अपने हिसाब से सोचते हैं।लोगों के हिसाब से जिंदगी जीने की कोशिश में हम अपना हिसाब भी भूल जाते हैं। अपने दिल से पूछिए। अगर आपको लगता है कि आप सही हैं तो किसी को साबित करने की जरूरत नहीं है। बस अपना काम करते रहिए। वक्त खुद हर सवाल का जवाब दे देता है।

शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

लोगों की फिक्र उतनी ही कीजिए जिससे आपकी जिंदगी में खुशियां बनी रहें। लोगों के हिसाब से जिंदगी जीने की कोशिश में हम अपना हिसाब भी भूल जाते हैं। अपने दिल से पूछिए। अगर आपको लगता है कि आप सही हैं तो किसी को साबित करने की जरूरत नहीं है। बस अपना काम करते रहिए। वक्त खुद हर सवाल का जवाब दे देता है।

लोगों की फिक्र उतनी ही कीजिए जिससे आपकी जिंदगी में खुशियां बनी रहें। 
लोगों के हिसाब से जिंदगी जीने की कोशिश में हम अपना हिसाब भी भूल जाते हैं। 
अपने दिल से पूछिए। अगर आपको लगता है कि आप सही हैं तो किसी को साबित करने की जरूरत नहीं है। बस अपना काम करते रहिए। वक्त खुद हर सवाल का जवाब दे देता है।

जिंदगी में इक मोड़ ऐसा भी आता है जब जिंदगी हमसे सवाल करती है :

तुमने दुनिया को क्या दिया,जिससे दुनिया तुम्हे याद रखे?
तुमने कितनों का दिल दुखाया?
तुमने कितनों के जख्मों पर मरहम रखा?
तुमने कितनों की जिंदगी को खुशियों से रौशन किया?
तुमने कितनों की जिंदगी को अंधेरे में ढकेल दिया?
तुमने कितने लोगों के ग़म को अपनाकर बदले में उनकी जिंदगी को खुशियों से भर दिया?
 अपनी जिंदगी में तुमने क्या खोया और क्या पाया?
 इंसान इन सवालों के जवाब ढूंढ़ता रह जाता है और जिंदगी अलविदा कहकर रुखसत हो जाती है। इसलिए 
हर दिन सुबह की शुरुआत में कहिए :
"हे ईश्वर! आपकी कृपा से मुझे आज का शुभ दिन मिला है। अपनी कृपा मुझपर बनाए रखना। मेरी वाणी, मेरे व्यवहार से किसी को भी कोई ठेस न पहुंचे।"
रात को सोते समय कहिए :
" हे परमेश्वर! आज आपकी कृपा प्राप्त हुई इसके लिए आपका धन्यवाद। यदि जाने अंजाने आज मुझसे किसी के दिल को ठेस पहुंची हो तो अज्ञानी समझकर मुझे क्षमा करना।"
ईश्वर परम दयालु है। वो हम पर अपनी नज़र और कृपा सदैव बनाए रखता है। हम उसे भूल जाएं लेकिन वो हमे कभी नहीं भूलता।
                  ......Surendra Kumar.....

जो है उसी को संजोकर रखिए। पूर्णता की खोज मिथ्या है। पूर्णता की खोज में जो हमारे पास है हम उसका भी आनंद नहीं उठा पाते। याद रखिए संसार में कोई भी पूर्ण नहीं है। परमेश्वर के अतिरिक्त कोई भी संपूर्ण नहीं है।

 जो है उसी को संजोकर रखिए।
 पूर्णता की खोज मिथ्या है।
 पूर्णता की खोज में जो हमारे पास है हम उसका भी आनंद नहीं उठा पाते। याद रखिए संसार में कोई भी पूर्ण नहीं है। परमेश्वर के अतिरिक्त कोई भी संपूर्ण नहीं है।


गर्व,घमंड,लोभ,ईर्ष्या,धन-दौलत, और शोहरत इन सवारियों के लिए जीवन की आखिरी गाड़ी में कोई भी सीट नहीं होती।

गर्व,घमंड,लोभ,ईर्ष्या,धन-दौलत, और शोहरत इन सवारियों के लिए जीवन की आखिरी गाड़ी में कोई भी सीट नहीं होती। 



बुधवार, 15 फ़रवरी 2023

आपके जाने का अगर किसी को कोई दुख नहीं..

आपके जाने का अगर किसी को कोई दुख नहीं।
तो समझ लीजिए कि आपके होने का भी कोई अर्थ नहीं था। आपकी जिंदगी ऐसी होनी चाहिए कि आपके होने और नहीं होने का कोई अर्थ हो।

न हो आपको कभी, तनिक भी दुख का आभास।खुशियां ही खुशियां खेले,सदा आपके आसपास।

न हो आपको कभी, तनिक भी दुख का आभास।
खुशियां ही खुशियां खेले,सदा आपके आसपास।
होठों पर रहे हमेशा मुस्कुराहट, न हो आप कभी भी उदास।
आपका दिन शुभ हो, सुप्रभात! सुप्रभात!

.............Surendra Kumar................

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2023

शब्दों की महिमा अनंत है।शब्द ही भविष्य की दशा और दिशा तय करते हैं।

शब्दों की महिमा अनंत है।
शब्द ही भविष्य की दशा और दिशा तय करते हैं।
शब्द रिश्ते जोड़ते हैं, शब्द ही रिश्ते तोड़ते भी हैं।
शब्द ही सुकून देते हैं, शब्द ही बेचैनी भी देते हैं।
शब्द ही दवा, दुआ और अमृत है, शब्द ही विष भी है।
शब्द ही भोजन को स्वादिष्ट बनाता है।
शब्द ही स्वादिष्ट पकवान को भी बेस्वाद बनाता है।
शब्द ही महाभारत करवा सकता है।
शब्द ही कालिदास बना सकता है।
शब्द ही तुलसीदास भी बना सकता है।
शब्द ही सम्मान दिलाता है।
शब्द ही अपमान भी दिलाता है।
अगर दिल से निकले आत्मा को परमात्मा से भी मिलाता है।




सोमवार, 13 फ़रवरी 2023

बिछाना राह में कांटे, कुछ लोगों की फितरत होती है।पाई - पाई का हिसाब रखती है, ये जो कुदरत होती है।

बिछाना राह में कांटे,  कुछ लोगों की फितरत होती है।
पाई - पाई का हिसाब रखती है, ये जो कुदरत होती है।

बिछाना राह में कांटे, कुछ लोगों की फितरत होती है।बदले में उनको भी कांटे ही देती है, ये जो कुदरत होती है।

बिछाना राह में कांटे, कुछ लोगों की फितरत होती है।
बदले में उनको कांटे ही देती है, ये जो कुदरत होती है।

हमारे पास जो है दुनिया को हम वही देते हैं। बदले में दुनिया से वापस भी वही मिलता है जो हमने दिया था।

हमारे पास जो है दुनिया को हम वही देते हैं।
 बदले में दुनिया से वापस भी वही मिलता है जो हमने दिया था। यही प्रकृति का न्याय है। लेकिन विडंबना यह है कि मनुष्य देता कुछ और है पाने की उम्मीद कुछ और करता है।

राहों में काँटे बिछा लो चाहे जितने। इरादे मजबूत हो तो शूल भी फूल बन जाते हैं।

राहों में काँटे बिछा लो चाहे जितने।
 इरादे मजबूत हो तो शूल भी फूल बन जाते हैं।

कुछ लोग खुद को समझते हैं हाकिम।वो इतना भी नहीं जानते कि, सारे जहां का हाकिम तो ऊपर बैठा है।

कुछ लोग खुद को समझते हैं हाकिम।
वो इतना भी नहीं जानते कि,
 सारे जहां का हाकिम तो ऊपर बैठा है।

संचित कर्म ही मनुष्य का स्वरूप निर्धारित करते हैं

शास्त्रों में उल्लिखित है:
संचित कर्मों के अनुसार ही मनुष्य का सांसारिक स्वरूप निर्धारित होता है। जन्म जन्मांतरों के संचित कर्मों के अनुसार ही मनुष्य शुभ-अशुभ फल भोगता है। परमात्मा दयालु है इसलिए शास्त्रों में यह भी उल्लिखित हैं कि मनुष्य अपने सद्कर्मों के द्वारा अशुभ फलों को न्यून भी कर सकता है। किंतु अहं के वशीभूत  मनुष्य इस शाश्वत सत्य को जानते हुए भी सद्कर्मों की ओर प्रवृत्त नहीं होता।
इसी का नाम कलियुग है।



शनिवार, 11 फ़रवरी 2023

तुमको क्या मिला, मायने यह नहीं रखता।तुमने क्या दिया, ज़माना इसी से चलता है।सूरज ने भी कभी, धूप का हिसाब नहीं रखा।वो तो सारे जहां के लिए जलता है।रोज निकलता है, रोज ढलता है।रिश्ते रंग बदलते हैं,ज़माना भी रंग पर रंग बदलता है।उस चराग़ की रौशनी कभी कम नहीं होती,जो अपने अंधेरों को भूलकर,लोगों के लिए जलता है।

तुमको क्या मिला,मायने यह नहीं रखता।
तुमने क्या दिया,ज़माना इसी से चलता है।
सूरज ने भी कभी, अपनी धूप का हिसाब नहीं रखा।
वो तो सारे जहां के लिए जलता है।
रोज निकलता है, रोज ढलता है।
रिश्ते रंग बदलते हैं,ज़माना भी  रंग पर रंग बदलता है।उस चराग़ की रौशनी कभी कम नहीं होती,
जो अपने अंधेरों को भूलकर,लोगों के लिए जलता है।

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2023

फुरसत के कुछ पल, किसी अनमोल ख़ज़ाने से कम नहीं होते।

फुरसत के कुछ पल, 
किसी अनमोल ख़ज़ाने से कम नहीं होते।
जो समझते हैं इन पलों की अहमियत,
 उनकी जिंदगी में कभी ग़म नहीं होते।

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2023

दिल इतना तो खुला रखना कि, चार कांधों का साथ मिल जाए। बाद जाने के तेरे, न ये ज़माना मुस्कुराए।

दिल इतना तो खुला रखना कि,
 चार कांधों का साथ मिल जाए। 
बाद जाने के तेरे, न ये ज़माना मुस्कुराए।

बंद हो जाएंगी कभी भी आंखें।साँसें भी अलविदा कह देंगी।

बंद हो जाएंगी कभी भी आंखें।
साँसें भी अलविदा कह देंगी।
रहेगी ज़िंदा सिर्फ मुस्कुराहट तेरी।
सब मुलाकातें भी अलविदा कह देंगी।

• सब मुलाकातें : रिश्ते नातें, यार - दोस्त 

हमारे शब्द ही हमारे व्यक्तित्व का दर्पण हैं।

हमारे शब्द ही हमारे व्यक्तित्व का दर्पण हैं।
शब्द ही ब्रह्म है। यही सृष्टि का आधार है।
शब्दों का दिल तोड़ देने वाला प्रयोग जितना आसान है,
शब्दों का दिल छू लेने वाला प्रयोग उतना ही मुश्किल।
बिना कुछ पाने की इच्छा रखे,सबका भला चाहने का भाव रखना अत्यंत कठिन कार्य है। ईश्वर की कृपा के बिना यह दैवीय भाव प्राप्त नहीं होता।

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दिल किसी का मत दुखाना, दिल में खुदा रहता है।
मंजिल तो सबकी एक है, बस रास्ता जुदा रहता है।

रेत के आशियां को,तूफानों से बचाकर रखना।

रेत के आशियां को, तूफां से बचाकर रखना।
अपनी रुसवाई का ग़म, दिल में छुपाकर रखना।
हंसेंगे लोग,कहेंगे पागल-2
अपने अश्कों को, तबस्सुम-सा सजाकर रखना।


दिल ए किताब का पन्ना

दिल -ए -किताब का पन्ना,हर किसी के लिए नहीं खुलता।जिधर यकीन हो जाए,तो खुद ब खुद खुल जाता है।

कोई पंखों से, कोई हौसलों से उड़ता है।

कोई पंखों से, कोई हौसलों से उड़ता है।
मंजिल तभी मिलती है, जब आदमी,
अपनी ज़मीं से जुड़ता है।

मजिलों के रास्ते में, तूफान तो मिलते हैं।

मजिलों के रास्ते में, तूफान तो मिलते हैं।
खिलने वाले फूल तो,  सहरा में भी खिलते हैं।

सोमवार, 6 फ़रवरी 2023

जुबां खामोशियों की, लफ्जों की मोहताज़ नहीं होती...

जुबां खामोशियों की, लफ्जों की मोहताज़ नहीं होती।
  रुख़ की सिलवटों से जो बात निकल जाती है-2
 लफ्जों-अल्फाजों से वो बात नहीं होती।
  

आपका हंसता मुस्कुराता चेहरा.....


आपका हंसता मुस्कुराता चेहरा,
मेरे दिन का खुशनुमा आगाज़ था।
ऐसा लगता था जैसे कोई अपना मेरे पास था।


कल के बाद इक नई शुरुआत होगी...

कल के बाद इक नई शुरुआत होगी।
न आपसे, न किसी और से बात होगी।

चराग़ सूरज को जलना सिखा रहे हैं।

चराग़  सूरज को जलना सिखा रहे हैं।
दो कदम ठीक से भी जो चल न सके,
वो दूसरों को चलना सिखा रहे हैं।

मैं जलता नहीं किसी घर को जलाने के लिए।

मैं जलता नहीं किसी घर को जलाने के लिए।
मैं तो जलता हूं सारे ज़माने के लिए।

चांद का नूर

चांद का नूर, बहुत दूर, बहुत दूर तक बिखरता है।
ये कोई चराग़ नहीं, जो कभी भी ढल जाए।

किसी शख्स, किसी शै में....


किसी शख्स किसी  शै में, खुशी तलाश न कर।
ये तो जागीर है दिल की, कहां दुनिया में मिलती है?

ताउम्र जिंदगी मेरी तलाश में रही....

ताउम्र जिंदगी मेरी तलाश में रही।
अब मिला तो वो कहती है-
"मुझको जाना है।"

ग़ज़ल का दर्द से रिश्ता बहुत पुराना है।

ग़ज़ल  का दर्द से रिश्ता बहुत पुराना है।
ये आम शै नहीं, जो हर दुकां में मिल जाए।

रविवार, 5 फ़रवरी 2023

मतलबी दुनिया में....

मतलबी दुनिया में, मतलब परस्ती भी शर्मिंदा है।
इंसानियत तोड़ रही दम,सिर्फ इंसान ज़िंदा है।

चांद पागल है जाने क्या ढूंढ़े...

चांद पागल है, जाने क्या ढूंढ़े?
 सहर होते ही, तेरा अक्स भी मिट जाएगा।

शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

अपनी आंखों के समंदर को संभाला हमने

अपनी आंखों के समंदर को संभाला हमने।
कहीं ज़रा सा भी छलका तो डूब जाऊंगा।
........ Surendra Kumar..........

महफिल ए दुनिया में आदमी क्यों तन्हा है,....,

महफिल ए दुनिया में, आदमी क्यों तन्हा है।
जिंदगी के मेले में, आदमी क्यों तन्हा है?
घिरा है रिश्तों से मगर, फिर भी क्यों तन्हा है?
दोस्त है, दुश्मन है, हबीब ओ रकीब भी हैं।
सिसकियां लेता हुआ, आदमी क्यों तन्हा है?

जिंदगी की राह में......

जिंदगी की राह में यूं तो शख्स बेशुमार मिलते है।
पर चंद चराग़ ही तूफान के साथ जलते हैं।

हर शख्स में अक्स अपना

हर शख्स में अक्स अपना ढूंढ़ा नहीं करते ऐ मेरे दोस्त!
क्योंकि हर शख्स ,आईना नहीं होता।

वक्त इतना भी नहीं कि दुआ सलाम भी कर लेते

वक्त इतना भी नहीं की, दुआ सलाम भी कर लेते।
काम से मिल गई हो फुरसत,
तो ज़रा राम राम भी कर लेते।

अपने अपने नहीं गैरों की बात रहने दो

अपने, अपने नहीं गैरों की बात रहने दो।
कोई समझे कि नहीं, दिल की बात कहने दो।

कल थे जिनके लिए हम रौनक ए महफिल की तरह।
आज हम हो गए उनके लिए, पत्थर की तरह।
उनकी आंखों में न आसूं, कभी आने पाएं।
अश्क आंखों से मेरी बहते हैं तो बहने दो।

हमने अपनों के लिए, ग़म हैं बेशुमार सहे।
वक्त बदला तो ये अपने, मेरे अपने न रहे।
कोई पागल कहे, मुझको तो आज कहने दो।
अपने,अपने नहीं गैरों की बात रहने दो....


गिर गिर के संभलना

गिर गिरके संभलना अब सीख लिया हमने।
दुनिया को तो बदल न सके,इसलिए खुद को ही
बढ़िया हमने।

कभी किसी का बुरा...

कभी किसी का भी बुरा नहीं किया हमने।
लोग न जाने क्यों खंजर उठाए फिरते हैं।