JAGJIT SINGH
- GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
किसी के भरोसे दुनिया नहीं चलती,भरोसा ख़ुद पर ही करना पड़ता है।अपने वजूद की खातिर,कभी ख़ुद से,कभी दुनिया से लड़ना पड़ता है।महज़ खामोशी ही, अच्छी फितरत की निशानी नहीं होती।बात खुद्दारी पे आ जाए तो ए दोस्त!,कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ता है।
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