JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

मंगलवार, 13 जून 2023

जिसे देखो,मतलब परस्ती में जी रहा है।और कोई ऐसा भी है जो, भूलकर अपने ग़मों को,ज़ख्म औरों के सी रहा है।कहाँ गया रूठकर जाने वाले, वापस आ जा!कोई अब तक तेरे इंतज़ार में जी रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें