JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

सोमवार, 6 मार्च 2023

मैं चराग हूं , जल तो रहा हूं, बेशक धीरे - धीरे ही सही।अंधेरों से लड़ तो रहा हूं, धीरे - धीरे ही सही।हाथ पर हाथ धरे तो नहीं बैठा हूं, कोशिश तो कर रहा हूं।धीरे धीरे ही सही।मुझे मालूम है मैं कभी भी बुझ सकता हूं,मगर तूफानों से लड़ तो रहा हूं,धीरे धीरे ही सही।ये दुनिया मुझे भुला दे या दिल में रखे, परवाह नहीं।दिल पे दस्तक तो दे रहा हूं, धीरे धीरे ही सही।

मैं चराग हूं , जल तो रहा हूं, बेशक धीरे - धीरे ही सही।
अंधेरों से लड़ तो रहा हूं, धीरे - धीरे ही सही।
हाथ पर हाथ धरे तो नहीं बैठा हूं, कोशिश तो कर रहा हूं।
धीरे धीरे ही सही।
मुझे मालूम है मैं कभी भी बुझ सकता हूं,
मगर तूफानों से लड़ तो रहा हूं,
धीरे धीरे ही सही।
ये दुनिया मुझे भुला दे या दिल में रखे, परवाह नहीं।
दिल पे दस्तक तो दे रहा हूं, धीरे धीरे ही सही।


 

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