JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

शनिवार, 8 अप्रैल 2023

बहुत रुलाया है दुनिया ने, कोई बात नही।चलो, सब भूलकर, दुनिया को हँसाया जाए।तोड़ने वालों ने तोड़ा है, कोई बात नही।चलो अब आशियां को फिर से बनाया जाए।चराग बुझ गया हवा से कोई बात नही।हर इक चराग को अब फिर से जलाया जाए।लफ्ज़-ओ-अल्फाज़ में जज़्बात अब नहीं मिलते।लफ्ज़-ओ-अल्फाज़ को जज्बातों से मिलाया जाए।चल पड़ा फिर कोई शायद तन्हा।चलो उस शख़्स को अपनों से मिलाया जाए।सिसकियाँ ले रहा शायद कोई।चलो उसके लिए सपनों को सजाया जाए।मिले हर राह में काँटे मुझको।चलो हर राह को फूलों से सजाया जाए।बिखर-बिखर गया हर बार ,फिर नहीं संवरा।चलो अब ज़िंदगी को फिर से संवारा जाए।

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