कोई आएगा, इस इंतजार में क्यों बैठे हो?
कोई चाहेगा,बेकरार से क्यों बैठे हो?
इतना आसां नहीं,आँखों में किसी की बसना।
क्यों सरे राह यूं आँखेँ बिछाए बैठे हो?
हुस्न वाले हवा से होते हैं।
क्यों उनके सामने दीपक जलाए बैठे हो?
ये आसमां ही आफताब का ठिकाना है।
ज़मीं पे ये कभी तो उतरेगा,
इस इंतजार में क्यों बैठे हो?
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