JAGJIT SINGH
- GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
नफ़रत चाहे जितना भी शोर कर ले,मगर सुकून उसे,मुहब्बत की पनाह में ही मिलता है।मुहब्बत की ज़मीं पर ही,खुशियों का फूल खिलता है।सोच और लफ्ज़ में जिनकी,महज नफरत-ओ-गुमां होता है।आख़िरी वक्त में वो भटकते हैं तन्हा,नहीं बाकी उनका नामों निशां होता है।
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