JAGJIT SINGH
- GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
दौलत-ओ-शोहरत के पीछे, इंसान इंसान को भूल गया।अपनी हस्ती के गुमां में, रिश्ते तो रिश्ते,खुदा को भी भूल गया?
दौलत-ओ-शोहरत के पीछे,
इंसान इंसान को भूल गया।
अपनी हस्ती के गुमां में,
रिश्ते तो रिश्ते,
खुदा को भी भूल गया?
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