JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

सोमवार, 1 मई 2023

चार दिन ही तो मिले हैं जिंदगानी के,
 इन्हे नफरतों में यूं तो न ज़ाया कीजै।
 भूल जाओगे अपना हर ग़म,
 कभी 'ख़ुद' से भी बाहर आया कीजै।
 याद रखती उन्हीं को दुनिया है, 
 जो जलके रोशनी लुटाते हैं।
चराग बन न सको गर तो कोई बात नहीं,
जो जल रहा है उसे तो न बुझाया कीजै।

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