JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

सोमवार, 17 मार्च 2025

तबस्सुम

तमन्ना यही है कि,
हर लब पर तबस्सुम हो।
न कोई तन्हा हो,
न कोई गुमसुम हो।
सिर्फ हम ही हम हो हर तरफ़।
न कोई मैं हो, न कोई तुम हो।

शनिवार, 8 मार्च 2025

सहरा कभी गुलज़ार नहीं होगा

हर बार यही सोचा,
अब नहीं होगा।
जो हुआ इस बार,
इस बार नहीं होगा।
किसी से उम्मीद रखना,
अच्छा नहीं होता।
पतझड़ का मौसम,
कभी बहार नहीं होगा।
सहरा में दूर तलक,
पानी का कतरा नज़र नहीं आता।
कितना भी बरस जाए यहां सावन,
सहरा कभी गुल -ए -गुलज़ार नहीं होगा।

गुरुवार, 25 जनवरी 2024

dekhi har kisi ne

देखी हर किसी ने रौशनी चराग की,

उसका जलना किसी ने नहीं देखा।

गिर रहा था तो दुनिया की थी नज़र,

मेरा संभलना किसी ने नहीं देखा।

मेरे हंसने पर हंसती रही दुनिया।

मेरा सिसकना किसी ने नहीं देखा।

समंदर आंखों का, देखती रह गई ये दुनिया।

उनका बहना किसी ने नहीं देखा।

बुधवार, 15 नवंबर 2023

खामोशियों को पढ़ने का हुनर,

सबको नहीं आता।

रूठने वाले को मनाने का हुनर,

सबको नहीं आता।

पल भर के लिए आंखों में तो,

कोई भी बस जाता है।

दिल में बस जाने का हुनर,

सबको नहीं आता।