JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

मंगलवार, 29 मार्च 2011

तेरे दरस की प्यासी आंखें...

तेरे दरस की प्यासी आँखें ,हे शिव शम्भू भोलेनाथ -२
अब तो दरसन दे दो मुझको हे त्रिपुरारि दीनानाथ .
तेरे दरस की प्यासी ऑंखें .....................
ॐ नमः शिवाय -२

न मैं चाहूँ हीरे मोती , और न चाहूँ  ऊँची शान 
हमको दे दो हे शिव शंकर , अपने चरणों में स्थान -२
सारी दुनिया के रखवाले ,तुम हो सरे जग के नाथ 
तेरे दरस की प्यासी आँखें ..................
ॐ  नमः शिवाय -२

जो करते हैं तेरा पूजन ,वो नर हर सुख पाते हैं -२
जो जपते हैं जय शिव हर क्षण , भाव सागर तर जाते हैं -२
तन- मन-धन सब वारा तुम पर मान लिया तुम्हे जीवन नाथ .
तेरे दरस की प्यासी ऑंखें हे शिव शम्भू भोलेनाथ 
अब तो दरसन दे दो मुझको हे त्रिपुरारि दीनानाथ 
तेरे दरस की प्यासी ऑंखें ......................  


                                                 गीत : सुरेन्द्र कुमार  

Dard Se Mera Daaman Bharde Ya Allah-Lata Mangeshkar

बुधवार, 16 मार्च 2011

यूं तो मिलते हैं ज़माने में

यूं तो मिलते हैं, ज़माने में यूं,मिलने वाले।
नहीं मिलते, दिल ए जज़्बात समझने वाले।

जो तेरे पास ये दौलत है तो ये दुनिया है।
नहीं दौलत तो लें, मुंह फेर ये मिलने वाले।
यूं तो मिलते हैं.......

नहीं मरहम तेरे जख्मों पे लगाए कोई।
मिलेंगे लाख तेरे हाल पे हँसने वाले।
यूं तो मिलते हैं, ज़माने में .....

तेरे जीवन में तेरा साथ न देगा कोई।
आएंगे लाख तेरी लाश पे रोने वाले।

यूं तो मिलते हैं ज़माने में यूं मिलने वाले।
नहीं मिलते दिल ए जज़्बात समझने वाले।

          ............. ग़ज़ल  :  सुरेन्द्र कुमार 

मंगलवार, 15 मार्च 2011

साक्षरता गीत

अज्ञान के इस अंधियारे में ज्ञान का दीप जलाना है।
भारतवर्ष के हर इंसा को, साक्षर हमें बनाना है।
शिक्षा का मतलब समझाने बस्ती बस्ती जाना है।
धोखा अगर नहीं खाना तो,शिक्षा को अपनाना है।
अज्ञान के इस अंधियारे में...


ज्ञान के इस कोमल पथ पर हमको चलते ही जाना है। 
देकर सबको ज्ञान का अमृत साक्षर देश बनाना है।
अज्ञान के इस अंधियारे में, ज्ञान का दीप जलाना है।
 भारतवर्ष के हर इंसा को.....
साक्षर हमें बनाना है।

HUMEIN DIYA HAI DHARTI NE

हमें दिया है धरती ने, जीवन का ये वरदान सुनो। 
उसके अहसानों को मानो, मौत के मत सामान चुनो


सुनो धरा पर अगर एक भी,वृक्ष नहीं रह जाएगा।
ना तो वर्षा होगी, प्राणी प्यासा ही मर जाएगा।
हरियाली खुशहाली चुन लो, मत लोगों श्मशान चुनो।
उसके अहसानों को मानो, मौत के मत सामान चुनो।

जिस धरती ने तेरे भीतर,प्राणों का संचार किया।
उस धरती के सीने में,तूने खंजर से वार किया।
अब तो तौबा कर लो लोगों....
हैवान नहीं, इंसान बनो।
उसके अहसानों को मानो, मौत के मत सामान चुनो।
मौत के मत सामान चुनो...
मौत के मत सामान चुनो...
मौत के मत सामान चुनो...



मेहनत के पथ पे चलकर

मेहनत के पथ पे चलकर सबकुछ तुझे मिलेगा।
उजड़ा हुआ ये गुलशन इक बार फिर खिलेगा।
मेहनत के पथ पे चलकर सबकुछ तुझे मिलेगा।


किसी और के सहारे, खुद को न छोड़ हम दम।
कहते हैं जिसको दुनिया, नहीं बांटती कभी ग़म।
मत सोच मुश्किलों में कोई तुझको थाम लेगा।
मेहनत के पथ पे चलकर .....


मंजिल हैं दूर लेकिन, है रास्ता कठिन भी।
कांटों पे हंसके चलना, है वक्त का चलन भी।
विश्वास रख खुदा पे, मेहनत का फल मिलेगा।
मेहनत के पथ पे चलकर, सबकुछ तुझे मिलेगा।
उजड़ा हुआ ये गुलशन, इक बार फिर खिलेगा।

.........रचनाकार : Surendra Kumar...... 

ANSOO

MERI  HAR  RAAT  ANSUON MEIN GUZAR JATI  HAI 
PAR  MERE  HAAL  PE  UNKO  TO  HANSI  AATI  HAI



AAJ  PEHLI  BAAR  HUM  GAYE  THE  MAYKHANE MEIN 
JAAM  HONTHO SE  LAGAYA THA  KI , SHOR  UTH  GAYA ZAMANE MEIN.


APNE GHAM  KO  KAHIN  BAYAN  NA  KARNA
ZAKHMI  DIL  AUR  ZAKHMI  HOGA  VARNA.




दोस्त बनकर रकीब रहते हैं।
और खुद को हबीब कहते हैं।


अपना ग़म ही इक अपना है।
बाकी बस इक सपना है।



सोमवार, 14 मार्च 2011

वो कब कूचे में आएंगे....

हम आस लगाए बैठे हैं, वो कब कूचे में आएंगे।
वीरान पड़ा गुलशन मेरा, आकर वो इसे महकाएंगे।

हीरों की चमक है आंखों में, फूलों की महक हैं सांसों में।
चलती वो नदी सी बलखाती, चांदी की खनक बातों में,
 
 ये चांद सितारे भी उनको, जब देखेंगे शरमाएंगे। 
  हम आस लगाए बैठे हैं।
वो कब कूचे में आएंगे।


 

 
  

JAGJIT SINGH

JAGJIT SINGH JI KO YUN HI GHAZAL SAMRAT NAHIN KAH DIYA JATA .GHAZAL KO AAM LOGON TAK PAHUNCHANE MEIN  UNKI  MAKHMALI AWAZ  AUR SARAL LAFZON KA AHAM ROLE HAI .UNHONE GHAZAL KO PURE CLASSICAL KI DUNIYA SE NIKALKAR AAM LOGON KE DILON TAK PAHUCHAYA. AAJ  AAM  AADMI  BHI GHAZAL KI TASEER KO MAHSOOS  KARNE LAGA  HAI  . NEW GENERATION  MEIN TO AAJ JAGJIT SINGH  JANA MANA  NAAM BAN CHUKA HAI. AAJ  SCHOOL ,COLLEGES MEIN PADHNE WALE STUDENTS 
JAGJIT SINGH  KI  GHAZAL SUNKAR APNI  STUDIES MEIN JYADA DHYAN DE PATE HAIN .
UNKI  MAKHMALI  AUR  MADHUR  AWAZ  UNKI  PADHAI MEIN KISI TARAH  KI  RUKAVAT  PAIDA NAHIN  KARTI . UNKI  AWAZ  SEEDHE  LOGON  KE  DIL  KO  CHOO  LETI  HAI.
ITNA  SUREELA  GANE KE LIYE  , LOGON  KE  DIL  MEIN  UTARNE  KE  LIYE  UNHONE  BAHUT  MEHNAT  KI  HAI.  JAANE  KITNE  HI  LOGON  NE  GHAZAL  GAYKI  KI  DUNIYA MEIN  APNA  MUKHTALIF  MUKAM  HASIL  KARNE  KI  KOSHISH  KI   MAGAR  KOI   US   MUKAM  KO  HASIL  NAHIN   KAR  PAYA.  HUM  CLASSICAL   MUSIC  SEEKHKAR  SANGEET   KI   BAREEKIYON  KO   TO  JAAN   SAKTE   HAIN. LEKIN  AAWAZ   MEIN  EK  JADOO  HOTA  HAI   WOH  OOPAR  WALE  KI  HI  DEN  HOTA  HAI . UNKI   AWAZ   HAMARE  DIL  KO EK   SUKOON   DETI   HAI   HUM   KUCH   SAMAY  KE   LIYE  HI   SAHI, APNI   SARI  PARESHANIYON   KO  BHOOL  JATE  HAIN . KUDA  KARE   YE  AWAZ   YUN  HI   TA-UMRA  LOGON   KE  DILON  KO   SUKOON  PAHUNCHATI   RAHE.


                                             SHABBA-KHAIR...............     

दिल को तेरे सिवा कोई भाता नहीं।

दिल को तेरे सिवा कोई भाता नहीं।
चैन तेरे सिवा मुझको आता नहीं।  

तू है मेरा खुदा, तू मेरी जिंदगी।
तू इबादत मेरी, तू मेरी बंदगी। 
हर तरफ तू ही तू, ऐ मेरे हमनशी। 
और कुछ भी नजर,मुझको आता नहीं।

मेरी हर सांस तू,मेरा अहसास तू।
मेरा आगाज़ तू,मेरा अंजाम तू।
कबसे रहती है तू,मेरी धड़कन में भी।