JAGJIT SINGH
- GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
गुरुवार, 31 मार्च 2011
मंगलवार, 29 मार्च 2011
तेरे दरस की प्यासी आंखें...
अब तो दरसन दे दो मुझको हे त्रिपुरारि दीनानाथ .
तेरे दरस की प्यासी ऑंखें .....................
ॐ नमः शिवाय -२
न मैं चाहूँ हीरे मोती , और न चाहूँ ऊँची शान
हमको दे दो हे शिव शंकर , अपने चरणों में स्थान -२
सारी दुनिया के रखवाले ,तुम हो सरे जग के नाथ
तेरे दरस की प्यासी आँखें ..................
ॐ नमः शिवाय -२
जो करते हैं तेरा पूजन ,वो नर हर सुख पाते हैं -२
जो जपते हैं जय शिव हर क्षण , भाव सागर तर जाते हैं -२
तन- मन-धन सब वारा तुम पर मान लिया तुम्हे जीवन नाथ .
तेरे दरस की प्यासी ऑंखें हे शिव शम्भू भोलेनाथ
अब तो दरसन दे दो मुझको हे त्रिपुरारि दीनानाथ
तेरे दरस की प्यासी ऑंखें ......................
गीत : सुरेन्द्र कुमार
गीत : सुरेन्द्र कुमार
बुधवार, 16 मार्च 2011
यूं तो मिलते हैं ज़माने में
यूं तो मिलते हैं, ज़माने में यूं,मिलने वाले।
नहीं मिलते, दिल ए जज़्बात समझने वाले।
जो तेरे पास ये दौलत है तो ये दुनिया है।
नहीं दौलत तो लें, मुंह फेर ये मिलने वाले।
यूं तो मिलते हैं.......
नहीं मरहम तेरे जख्मों पे लगाए कोई।
मिलेंगे लाख तेरे हाल पे हँसने वाले।
यूं तो मिलते हैं, ज़माने में .....
तेरे जीवन में तेरा साथ न देगा कोई।
आएंगे लाख तेरी लाश पे रोने वाले।
यूं तो मिलते हैं ज़माने में यूं मिलने वाले।
नहीं मिलते दिल ए जज़्बात समझने वाले।
............. ग़ज़ल : सुरेन्द्र कुमार
मंगलवार, 15 मार्च 2011
साक्षरता गीत
अज्ञान के इस अंधियारे में ज्ञान का दीप जलाना है।
भारतवर्ष के हर इंसा को, साक्षर हमें बनाना है।
भारतवर्ष के हर इंसा को, साक्षर हमें बनाना है।
शिक्षा का मतलब समझाने बस्ती बस्ती जाना है।
धोखा अगर नहीं खाना तो,शिक्षा को अपनाना है।
अज्ञान के इस अंधियारे में...
अज्ञान के इस अंधियारे में...
ज्ञान के इस कोमल पथ पर हमको चलते ही जाना है।
देकर सबको ज्ञान का अमृत साक्षर देश बनाना है।
अज्ञान के इस अंधियारे में, ज्ञान का दीप जलाना है।
भारतवर्ष के हर इंसा को.....
साक्षर हमें बनाना है।
HUMEIN DIYA HAI DHARTI NE
हमें दिया है धरती ने, जीवन का ये वरदान सुनो।
उसके अहसानों को मानो, मौत के मत सामान चुनो।
उसके अहसानों को मानो, मौत के मत सामान चुनो।
सुनो धरा पर अगर एक भी,वृक्ष नहीं रह जाएगा।
ना तो वर्षा होगी, प्राणी प्यासा ही मर जाएगा।
हरियाली खुशहाली चुन लो, मत लोगों श्मशान चुनो।
उसके अहसानों को मानो, मौत के मत सामान चुनो।
उसके अहसानों को मानो, मौत के मत सामान चुनो।
जिस धरती ने तेरे भीतर,प्राणों का संचार किया।
उस धरती के सीने में,तूने खंजर से वार किया।
अब तो तौबा कर लो लोगों....
हैवान नहीं, इंसान बनो।
उसके अहसानों को मानो, मौत के मत सामान चुनो।
मौत के मत सामान चुनो...
मौत के मत सामान चुनो...
मौत के मत सामान चुनो...
मेहनत के पथ पे चलकर
मेहनत के पथ पे चलकर सबकुछ तुझे मिलेगा।
उजड़ा हुआ ये गुलशन इक बार फिर खिलेगा।
मेहनत के पथ पे चलकर सबकुछ तुझे मिलेगा।
किसी और के सहारे, खुद को न छोड़ हम दम।
कहते हैं जिसको दुनिया, नहीं बांटती कभी ग़म।
मत सोच मुश्किलों में कोई तुझको थाम लेगा।
मेहनत के पथ पे चलकर .....
मंजिल हैं दूर लेकिन, है रास्ता कठिन भी।
किसी और के सहारे, खुद को न छोड़ हम दम।
कहते हैं जिसको दुनिया, नहीं बांटती कभी ग़म।
मत सोच मुश्किलों में कोई तुझको थाम लेगा।
मेहनत के पथ पे चलकर .....
मंजिल हैं दूर लेकिन, है रास्ता कठिन भी।
कांटों पे हंसके चलना, है वक्त का चलन भी।
विश्वास रख खुदा पे, मेहनत का फल मिलेगा।
मेहनत के पथ पे चलकर, सबकुछ तुझे मिलेगा।
मेहनत के पथ पे चलकर, सबकुछ तुझे मिलेगा।
उजड़ा हुआ ये गुलशन, इक बार फिर खिलेगा।
.........रचनाकार : Surendra Kumar......
ANSOO
MERI HAR RAAT ANSUON MEIN GUZAR JATI HAI
PAR MERE HAAL PE UNKO TO HANSI AATI HAI
AAJ PEHLI BAAR HUM GAYE THE MAYKHANE MEIN
JAAM HONTHO SE LAGAYA THA KI , SHOR UTH GAYA ZAMANE MEIN.
APNE GHAM KO KAHIN BAYAN NA KARNA
ZAKHMI DIL AUR ZAKHMI HOGA VARNA.
दोस्त बनकर रकीब रहते हैं।
PAR MERE HAAL PE UNKO TO HANSI AATI HAI
AAJ PEHLI BAAR HUM GAYE THE MAYKHANE MEIN
JAAM HONTHO SE LAGAYA THA KI , SHOR UTH GAYA ZAMANE MEIN.
APNE GHAM KO KAHIN BAYAN NA KARNA
ZAKHMI DIL AUR ZAKHMI HOGA VARNA.
दोस्त बनकर रकीब रहते हैं।
और खुद को हबीब कहते हैं।
अपना ग़म ही इक अपना है।
अपना ग़म ही इक अपना है।
बाकी बस इक सपना है।
सोमवार, 14 मार्च 2011
वो कब कूचे में आएंगे....
हम आस लगाए बैठे हैं, वो कब कूचे में आएंगे।
वीरान पड़ा गुलशन मेरा, आकर वो इसे महकाएंगे।
हीरों की चमक है आंखों में, फूलों की महक हैं सांसों में।
चलती वो नदी सी बलखाती, चांदी की खनक बातों में,
ये चांद सितारे भी उनको, जब देखेंगे शरमाएंगे।
हम आस लगाए बैठे हैं।
वो कब कूचे में आएंगे।
JAGJIT SINGH
JAGJIT SINGH JI KO YUN HI GHAZAL SAMRAT NAHIN KAH DIYA JATA .GHAZAL KO AAM LOGON TAK PAHUNCHANE MEIN UNKI MAKHMALI AWAZ AUR SARAL LAFZON KA AHAM ROLE HAI .UNHONE GHAZAL KO PURE CLASSICAL KI DUNIYA SE NIKALKAR AAM LOGON KE DILON TAK PAHUCHAYA. AAJ AAM AADMI BHI GHAZAL KI TASEER KO MAHSOOS KARNE LAGA HAI . NEW GENERATION MEIN TO AAJ JAGJIT SINGH JANA MANA NAAM BAN CHUKA HAI. AAJ SCHOOL ,COLLEGES MEIN PADHNE WALE STUDENTS
JAGJIT SINGH KI GHAZAL SUNKAR APNI STUDIES MEIN JYADA DHYAN DE PATE HAIN .
UNKI MAKHMALI AUR MADHUR AWAZ UNKI PADHAI MEIN KISI TARAH KI RUKAVAT PAIDA NAHIN KARTI . UNKI AWAZ SEEDHE LOGON KE DIL KO CHOO LETI HAI.
ITNA SUREELA GANE KE LIYE , LOGON KE DIL MEIN UTARNE KE LIYE UNHONE BAHUT MEHNAT KI HAI. JAANE KITNE HI LOGON NE GHAZAL GAYKI KI DUNIYA MEIN APNA MUKHTALIF MUKAM HASIL KARNE KI KOSHISH KI MAGAR KOI US MUKAM KO HASIL NAHIN KAR PAYA. HUM CLASSICAL MUSIC SEEKHKAR SANGEET KI BAREEKIYON KO TO JAAN SAKTE HAIN. LEKIN AAWAZ MEIN EK JADOO HOTA HAI WOH OOPAR WALE KI HI DEN HOTA HAI . UNKI AWAZ HAMARE DIL KO EK SUKOON DETI HAI HUM KUCH SAMAY KE LIYE HI SAHI, APNI SARI PARESHANIYON KO BHOOL JATE HAIN . KUDA KARE YE AWAZ YUN HI TA-UMRA LOGON KE DILON KO SUKOON PAHUNCHATI RAHE.
SHABBA-KHAIR...............
दिल को तेरे सिवा कोई भाता नहीं।
दिल को तेरे सिवा कोई भाता नहीं।
चैन तेरे सिवा मुझको आता नहीं।
तू है मेरा खुदा, तू मेरी जिंदगी।
तू इबादत मेरी, तू मेरी बंदगी।
हर तरफ तू ही तू, ऐ मेरे हमनशी।
और कुछ भी नजर,मुझको आता नहीं।
मेरी हर सांस तू,मेरा अहसास तू।
मेरा आगाज़ तू,मेरा अंजाम तू।
कबसे रहती है तू,मेरी धड़कन में भी।
चैन तेरे सिवा मुझको आता नहीं।
तू है मेरा खुदा, तू मेरी जिंदगी।
तू इबादत मेरी, तू मेरी बंदगी।
हर तरफ तू ही तू, ऐ मेरे हमनशी।
और कुछ भी नजर,मुझको आता नहीं।
मेरी हर सांस तू,मेरा अहसास तू।
मेरा आगाज़ तू,मेरा अंजाम तू।
कबसे रहती है तू,मेरी धड़कन में भी।
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