JAGJIT SINGH
- GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
हम सिर्फ कहने में नहीं,करने में विश्वास रखते हैं।घोर अंधेरों के बीच भी उजालों की आस रखते हैं।सबकी राहों से कांटों को चुनकर हम।राहों को भी गुलों से भरने में विश्वास रखते हैं।आज नहीं तो कल होगी,सुबह ज़रूर होगी।अंधेरों से डरकर बैठने वाले नहीं हम,सूरज को बादलों से निकालने,का जारी प्रयास रखते हैं।
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