JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

बुधवार, 17 मई 2023

मां की ममता

माँ सलाम,  तेरी मीठी मीठी लोरी को।
माँ सलाम,  तेरी उंगली से बंधी,प्रेम की अटूट डोरी को।
माँ सलाम, तेरे सजल नैनों को।
अपने खून सींचा है तूने तन मेरा,
माँ  सलाम, तेरे उन नौ महीनों को।
माँ  सलाम मेरे इंतजार में बेचैन,
तेरी उन आंखों को।
सिर मेरा अपनी गोदी में रख,
अपलक जागकर बिताई उन रातों को।
तेरी ममता का मोल कोई हो नहीं सकता।
ज़रा सी खरोच भी कलेजे के टुकड़ों को आ जाए तो,
मन तेरा चैन से सो नहीं नहीं सकता।
रिश्ते हजारों मिल जाए इस दुनिया मगर,
माँ तेरे जैसा कोई,
हो नहीं सकता।
हो नहीं सकता!
हो नहीं सकता!

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