JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

रविवार, 16 अप्रैल 2023

हमने देखा है वो मंजर

हमने देखा है, वो मंज़र।
जब अपनों के ही हाथ में था,खंजर।
सभी अपने, बेगानों में शामिल होते रहे।
अपनों के इंतज़ार में हम,अपनों को ही खोते रहे।
दरख़्त से पत्ते क्या उड़े,
पंछियों ने भी आशियाना छोड़ दिया।
वक्त बदलते ही,वक्त ने,
ज़िंदगी का रुख मोड़ दिया।
कांटों पे चलते रहे,
मखमली राहों की उम्मीद न थी।
ग़मों में इतने खो गए कि,  
होठों पे हँसी की उम्मीद न थी।
फिर ख़ुदा की रहमत ने, 
अंधेरों में रौशनी भर दी।
खुशियों से भर दिया दामन,
 और ग़मों में कमी कर दी।
मगर हमने कभी गुमां न किया,
रौशनी भी औरों के नाम कर दी....
रौशनी भी औरों के नाम कर दी....
रौशनी भी औरों के नाम कर दी

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