JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

शनिवार, 20 मई 2023

लोगों ने क्या दिया है, जो आँखें बिछाए बैठे हो?अंधेरों के बाशिंदों से, रौशनी की उम्मीद लगाए बैठे हो?जो भी करना है खुद ही कर लो तो बेहतर है, ए दोस्त!क्यों सहरा में आबशार की उम्मीद लगाए बैठे हो?

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