JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

शुक्रवार, 31 मार्च 2023

ठोकरें नज़रिया बदल देती हैं

ठोकरें नज़रिया बदल देती हैं,
 जीने का जरिया बदल देती हैं।
 बड़ी-बड़ी किताबें भी, 
 सिखा न सकीं जो सबक,
 ठोकरें पल में सिखाकर,
 ज़िंदगी का रुख बदल देती हैं।

गुरुवार, 30 मार्च 2023

जब तेरे घर से बुलावा आएगा...

ये दौलत,ये इल्म, ये शोहरत।
ये सब धरा रह जाएगा।
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
न रिश्ते,न नाते, न दिलकश वो बातें।
सब यहीं छूट जाएगा,
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
न खुशियाँ,न ग़म, न ज्यादा, न कम।
ये सब झमेला ख़त्म हो जाएगा।
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।
न इसका, न उसका, हुआ जग ये किसका?
तू ये सब जान जाएगा,
जब तेरे घर से बुलावा आएगा।



राह दिखाना या कांटे बिछाना

राह दिखाना या राह में काँटें बिछाना,
आदमी के माहौल-ओ-फितरत का नतीज़ा होता है।
कोई हर चेहरे पर मुस्कुराहट बांटता है,
कोई छोटी सी मुस्कान तक छीन लेता है।

किसी के ग़म पे हँस रहा था कोई।

किसी के ग़म पे हँस रहा था कोई।
किसी के ज़ख्म पे हँस रहा था कोई।
लगी ठोकर, गिरा वो मुंह के बल।
अकड़ के चल रहा था कोई।
गुमां में हर रिश्ते को भूल गया।
शोहरत-ए-बुलंदियाँ में खोकर,
ख़ुदा को भी भूल गया?
आखिरी वक्त जब आया,
अकेला ही चल रहा था कोई।

बुधवार, 29 मार्च 2023

भूलकर ख़ुद का वजूद,वजूद औरों का बनाते रह गए।इस कोशिश में लोग,हमें जाने क्या - क्या कह गए!रुसवाई भी, जग हँसाई भी हो गई,हम बस ख़ुद को आईने में देखते रह गए।

हम सभी का दिल से, एहतराम करते हैं।किसी को सलाम, किसी को राम राम कहते हैं।मगर भूलते नही कभी, अपनी खुद्दारी को।अपनी अपनी खुद्दारी को जिंदा रखकर ही, हर काम करते हैं।

हम सभी का दिल से, एहतराम करते हैं।
किसी को सलाम, किसी को राम राम कहते हैं।
मगर भूलते नही कभी, अपनी खुद्दारी को।
अपनी अपनी खुद्दारी को जिंदा रखकर ही,
 हर काम करते है।

मंगलवार, 28 मार्च 2023

जो हँसते थे कभी दूसरों के ग़म पर,
आज अपने घर के किसी कोने में,
अपनी हँसी तलाश रहे हैं।
जो शोहरत के गुमां में चूर थे कभी,
घर के आईने में आज ख़ुद को तलाश रहे हैं।

सोमवार, 27 मार्च 2023

नज़रिया और नज़र बदलना आसां नहीं होता।आदमी की फितरत बदलना आसां नहीं होता।देखने वाले आँखों से नहीं,अपनी सोच से दुनिया देखते हैं।उनकी सोच बदलना आसां नहीं होता।

नज़रिया और नज़र बदलना आसां नहीं होता।
आदमी की फितरत बदलना आसां नहीं होता।
देखने वाले आँखों से नहीं,
अपनी सोच से दुनिया देखते हैं।
उनकी सोच बदलना आसां नहीं होता।

रविवार, 26 मार्च 2023

हर किसी को ख़ुदा कुछ ख़ास देता है।किसी को दौलत,किसी को इल्म की सौगात देता है।दौलत का क्या?, ये तो इक रोज़ ख़त्म हो जाएगी।मगर इल्म ही आदमी को, पहचान इक ख़ास देता है।

हौंसला बढ़ाने वाले, दुनिया में बहुत कम मिलते हैं।
किसी को समझने वाले, दुनिया में बहुत कम मिलते हैं।
किसी वीराने को भी, गुलिस्तां जो बना दें।
ऐसे बाग़बान भी, बड़ी क़िस्मत से मिलते हैं।

गुरुवार, 23 मार्च 2023

हसरतें बहुत थीं,मगर वक्त बहुत कम था।भीड़ में भी तन्हा ही रहे, ताउम्र बस यही ग़म था।हम थे सबके मगर, कोई भी मेरा नही।वो भी गैर ही निकला,कल तक जो मेरा सनम था।अब तो आँखें भी खोलने का मन नहीं करता।क्या देखूं?,अब तो वो भी नहीं रहा, जो कभी ज़ख्मों का मरहम था।

गिराके खुद को उठाने से क्या हासिल होगा? किसी को सिर पे बिठाने से क्या हासिल होगा?

जो गुज़र गए, वे कभी लौटकर नहीं आने वाले।ये रास्ते हैं,आखिरी सफ़र को जाने वाले।किसी सामान या शोहरत की ज़रूरत नहीं तुझे।ख़ाली हाथ ही चल देते हैं,इस ओर को जाने वाले।लूटा कभी, छीना कभी, अब साथ क्या ले जाएगा?सबकुछ आपस में बांट लेंगे, तेरे चाहने वाले।दौलत से नहीं,लोगों से मुहब्बत कर, अरे नादान!वरना कल तुझे भुला देंगे,आज तेरी दौलत पे झुकने वाले।

ज़ख्म देता है तो, मरहम भी कोई देता है।कोई ठुकराता,कोई अपना बना लेता है।समझ सका नही,अब तक मैं तेरी रहमत को।कभी मोहताज,कभी आसमां पे बिठा देता है।

ज़ख्म देता है तो, मरहम भी कोई देता है।
कोई ठुकराता,कोई अपना बना लेता है।
समझ सका नही,अब तक मैं तेरी रहमत को।
कभी मोहताज,कभी आसमां पे बिठा देता है।

बुधवार, 22 मार्च 2023

अपनी खुद्दारी को ख़ुद से भी बड़ा समझो।अपनी रुसवाई को, न छोटी ख़ता समझो।ख़ुद से ज्यादा आपको जो याद रखता हो।सिर्फ उसको हमनशी और हमनवां समझो।

अपनी खुद्दारी को ख़ुद से भी बड़ा समझो।
अपनी रुसवाई को, न छोटी ख़ता समझो।
ख़ुद से ज्यादा आपको जो याद रखता हो।
सिर्फ उसको हमनशी और हमनवां समझो।

हर लम्हे का फैसला, ख़ुदा करता है।किसी को मिलाता,किसी को जुदा करता है।लोग समझते हैं कि, अपनों से बिछड़कर जी लेंगे।मगर इसका फैसला भी ख़ुदा करता है।

रविवार, 19 मार्च 2023

कोई न कोई ऐसा ज़िंदगी में,ज़रूर होना चाहिए।जिसके चेहरे,लफ्ज़, हँसी से,उदास दिल में भी सुरूर होना चाहिए।ज़िंदगी में ग़म के दौर हैं, तो खुशियाँ भी तो हैं।खुशियों का मकां बाहर नहीं दिल में हैं,मगर इसका पता आपको हुज़ूर होना चाहिए।...........Surendra Kumar...............

कोई न कोई ऐसा ज़िंदगी में,
ज़रूर होना चाहिए।
जिसके चेहरे,लफ्ज़, हँसी से,
उदास दिल में भी सुरूर होना चाहिए।
ज़िंदगी में ग़म के दौर हैं, तो खुशियाँ भी तो हैं।
खुशियों का मकां बाहर नहीं दिल में हैं,
मगर इसका पता आपको हुज़ूर होना चाहिए।
...........Surendra Kumar...............

मंगलवार, 14 मार्च 2023

न जाने लोग क्यों चेहरे को ओढ़ लेते हैं।किसी और को बनाकर अपना,किसी से मुंह मोड़ लेते हैं।

आईना देखकर सूरत पे गुमां न कर ए दोस्त!

आईना देखकर सूरत पे गुमां न कर ए दोस्त!जिंदगी हर रोज़ तुझे आईना दिखाती है।

आईना देखकर सूरत पे गुमां न कर ए दोस्त!
जिंदगी हर रोज़ तुझे आईना दिखाती है।

ज़माना बदलता है,लोग बदलते हैं,रिश्ते भी अपना रंग बदलते हैं मगर,धूप हो या छांव हो, दोस्त सच्चे , हमेशा साथ साथ चलते हैं।

शनिवार, 11 मार्च 2023

झोंके भी हवा के मुझे जीने नहीं देते।सीखा बड़ी मुश्किल से, ग़म-ए-दौर में जीना।माज़ी के ज़ख्म क्यों मुझे जीने नहीं देते।Date : 12/03/2023*ग़म-ए-दौर : दुखद समय *माज़ी : बीता हुआ समय............Surendra Kumar...........

झोंके भी हवा के मुझे जीने नहीं देते।
सीखा बड़ी मुश्किल से, ग़म-ए-दौर में जीना।
माज़ी के ज़ख्म क्यों मुझे जीने नहीं देते।

Date : 12/03/2023

*ग़म-ए-दौर : दुखद समय 
*माज़ी : बीता हुआ समय
............Surendra Kumar...........

चराग जलते ही अंधेरे सिमट जाते हैं।


चराग जलते ही अंधेरे सिमट जाते हैं।
हौसलों के आगे मुकद्दर भी पलट जाते हैं।
हौंसला तोड़ने वालों की फिक्र मत कर ऐ दोस्त! 
वक्त बदलते ही, ये लोग भी बदल जाते हैं।

शुक्रवार, 10 मार्च 2023

कुछ लोग शायरी की वजह बनकर आते हैं।कुछ जाते हुए खुद शायरी बनकर जाते हैं।कुछ लोग अपनी शख्सियत से दिल में घर कर जाते हैं।कुछ अपनी फितरत से,दिल से उतर जाते हैं।सोच-ओ-फितरत तो बदलकर देखो-2हर नज़र में फिर आप नजर आते हैं।

 कुछ लोग शायरी की वजह बनकर आते हैं।

कुछ जाते हुए खुद शायरी बनकर जाते हैं।

कुछ लोग अपनी शख्सियत से दिल में घर कर जाते हैं।

कुछ अपनी फितरत से,दिल से उतर जाते हैं।

सोच-ओ-फितरत तो बदलकर देखो-2

हर नज़र में फिर आप नजर आते हैं।

कुछ लोग शायरी की वजह बनकर आते हैं।कुछ जाते हुए खुद शायरी बनकर जाते हैं।कुछ लोग अपनी शख्सियत से दिल में घर कर जाते हैं।कुछ अपनी फितरत से,दिल से उतर जाते हैं।ज़माना चढ़ते सूरज को सलाम करता है।शाम ढलते ही चराग रौशन और ज़माने भर केदरवाज़े सूरज चढ़ने तक बंद हो जाते हैं।

गुरुवार, 9 मार्च 2023

रहना है तो लोगों के दिलों में रहो। ईंट पत्थर के मकां में रहना भी कोई रहना है? बसना है तो लोगों की आँखों में बसो,सपनों के शीशमहल में बसना भी कोई बसना है?हँसना हैं तो रोते को हँसाने के लिए हँसो,औरों की बेबसी पर हँसना भी कोई हँसना?Date : 9.03.2023..........Surendra Kumar..........

 रहना है तो लोगों के दिलों में रहो। ईंट पत्थर के मकां में रहना भी कोई रहना है? बसना है तो लोगों की आँखों में बसो,सपनों के शीशमहल में बसना भी कोई बसना है?हँसना हैं तो रोते को हँसाने के लिए हँसो,औरों की बेबसी पर हँसना भी कोई हँसना?Date : 9.03.2023..........Surendra Kumar..........

मंगलवार, 7 मार्च 2023

कुछ लोग कहते हैं, दौलत को अपना समझकर।अपनों के बिना भी जी लेंगे।शायद उनको यह नहीं मालूम,कि दौलत से सपने खरीदे जा सकते हैं, अपने नहीं।...........Surendra Kumar.............

अंधेरों से लड़ने वाले, रौशनी ढूंढ़ लेते हैं। हौसला रखने वाले, बंजर में भी नमी ढूंढ़ लेते हैं।

अंधेरों से लड़ने वाले,                            
रौशनी ढूंढ़ लेते हैं।                                
हौसला रखने वाले,                                
बंजर में भी नमी ढूंढ़ लेते हैं।

चराग़ जलते ही हर तरफ, रौशनी ही रौशनी बिखर जाती है।उनके आने की ख़बर सुनकर, फ़जा़ भी संदल सी महक जाती है।• संदल : चंदन फ़जा़: वातावरण .......... Surendra Kumar...........

सोमवार, 6 मार्च 2023

खुद को समझने में जिंदगी गुज़र गई,गिरकर संभलने में जिंदगी ठहर गई।अंधेरों में उजालों को ढूंढ़ता रहा उम्र भर-2इस कोशिश में, रौशनी बिखर गई।

खुद को समझने में जिंदगी गुज़र गई,
गिरकर संभलने में जिंदगी ठहर गई।
अंधेरों में उजालों को ढूंढ़ता रहा उम्र भर-2
इस कोशिश में, रौशनी बिखर गई।

आपका तहे दिल से शुक्रिया।सही राह दिखाने के लिए,आपका दिल से शुक्रिया।बहुत गुमां था हमें दोस्त!,अपने लफ्जों पर।लफ्ज़- ए - मायने समझाने के लिए,आपका दिल से शुक्रिया।किसी का वक्त, किसी और का नहीं होता।यह सही बात बताने के लिए,आपका दिल से शुक्रिया।गैरज़रूरी भी बहुत कुछ रहता है,हमारी बातों में।आईना मुझको दिखाने के लिए,आपका दिल से शुक्रिया।

मुझको, मुझसे मिलवाने के लिए,
आपका तहे दिल से शुक्रिया।
सही राह दिखाने के लिए,
आपका दिल से शुक्रिया।
बहुत गुमां था हमें दोस्त!,
अपने लफ्जों पर।
लफ्ज़- ए - मायने समझाने के लिए,
आपका दिल से शुक्रिया।
किसी का वक्त, किसी और का नहीं होता।
यह सही बात बताने के लिए,
आपका दिल से शुक्रिया।
गैरज़रूरी भी बहुत कुछ रहता है,
हमारी बातों में।
आईना मुझको दिखाने के लिए,
आपका दिल से शुक्रिया।

अहमियत अपनों की, उनके जाने के बाद पता चलती है। जैसे शमा ए महफिल की अहमियत, बुझने के बाद पता चलती है।

अहमियत अपनों की, 
 उनके जाने के बाद पता चलती है।
 जैसे शमा ए महफिल की अहमियत,
 बुझने के बाद पता चलती है।

मैं चराग हूं , जल तो रहा हूं, बेशक धीरे - धीरे ही सही।अंधेरों से लड़ तो रहा हूं, धीरे - धीरे ही सही।हाथ पर हाथ धरे तो नहीं बैठा हूं, कोशिश तो कर रहा हूं।धीरे धीरे ही सही।मुझे मालूम है मैं कभी भी बुझ सकता हूं,मगर तूफानों से लड़ तो रहा हूं,धीरे धीरे ही सही।ये दुनिया मुझे भुला दे या दिल में रखे, परवाह नहीं।दिल पे दस्तक तो दे रहा हूं, धीरे धीरे ही सही।

मैं चराग हूं , जल तो रहा हूं, बेशक धीरे - धीरे ही सही।
अंधेरों से लड़ तो रहा हूं, धीरे - धीरे ही सही।
हाथ पर हाथ धरे तो नहीं बैठा हूं, कोशिश तो कर रहा हूं।
धीरे धीरे ही सही।
मुझे मालूम है मैं कभी भी बुझ सकता हूं,
मगर तूफानों से लड़ तो रहा हूं,
धीरे धीरे ही सही।
ये दुनिया मुझे भुला दे या दिल में रखे, परवाह नहीं।
दिल पे दस्तक तो दे रहा हूं, धीरे धीरे ही सही।


 

जिनको यकीं खुद पर हो जाए।वो मुश्किलों में भी खुलके मुस्कुराए।ज़माने के भरोसे नहीं चलती, उनकी दुनिया -2जो अपनी मेहनत को ही, अपनी किस्मत बनाए।........... Surendra Kumar..............

जाने वाले ने मुड़कर मुझे देखा तक नहीं,क्या हम भी महज आंसू भर थे?जो उनकी आंखों में ठहर भी न सके।

जाने वाले ने मुड़कर मुझे देखा तक नहीं,क्या हम भी महज आंसू भर थे?जो उनकी आंखों में ठहर भी न सके।

हर मुलाकात का आगाज़ और अंजाम,खुशनुमा रखिए।क्या पता कल वो फिर मिले न मिले।

मिलना बिछड़ना तो जिंदगी का दस्तूर है।कुछ लोग इसे मुहब्बत भी कह देते हैं।

अब कुछ भी देने को नही बचा मेरे पास,आंखों की बारिश में दिल का सारा सैलाब भी बह गया।

कोई समझेगा इस खुशफहमी में मत रहना ए दोस्त!लोग अभी खुद को ही समझ नहीं पाए,तुझे क्या ख़ाक समझेंगे?

रविवार, 5 मार्च 2023

जिंदगी हर किसी को मौका भरपूर देती है।देर से ही सही , सिला मेहनत का ज़रूर देती है।बुझे चराग़ों को भी रौशनी, मयस्सर हो जाती है।जिंदगी जब अंधेरों को नूर देती है।• सिला: परिणाम , फल• मयस्सर : उपलब्ध• नूर : रोशनी,चमक............. Surendra Kumar............

जिंदगी हर किसी को मौका भरपूर देती है।
देर से ही सही , सिला मेहनत का ज़रूर देती है।
बुझे चराग़ों को भी रौशनी, मयस्सर हो जाती है।
जिंदगी जब अंधेरों को नूर देती है।

• सिला: परिणाम , फल
• मयस्सर : उपलब्ध
• नूर : रोशनी,चमक
............. Surendra Kumar............

कोई ना खुदा खुदा को भूलकर अपनी कश्ती को खुद डुबो रहा है।आफताब जिंदगी का सिर पर आ चुका है,और तू अभी तक सो रहा है?

कोई ना खुदा खुदा को भूलकर अपनी कश्ती को खुद डुबो रहा है।आफताब जिंदगी का सिर पर आ चुका है,और तू अभी तक सो रहा है?

शनिवार, 4 मार्च 2023

जैसे खुशबू गुलों की ,फ़ज़ा में बिखर जाती है।वैसे आदत भी आदमी की,असर लाती है।बहार ओ खिजां में भी, मुस्कुराता है वो गुल।जिस पर 'उस' बागबान की नज़र ठहर जाती है।• गुल : फूल। फ़ज़ा : वातावरण• उस : खुदा, ईश्वर• खिजां : पतझड़। बागबान: माली

दौलत - बदौलत से कुछ न मिलेगा।ये तेरी शोहरत से कुछ न मिलेगा।जिसे भी मिला है,जिसे भी मिलेगा।खुदा के करम से वो, मिलकर रहेगा।

दौलत - बदौलत से कुछ न मिलेगा।ये तेरी शोहरत से कुछ न मिलेगा।जिसे भी मिला है,जिसे भी मिलेगा।खुदा के करम से वो, मिलकर रहेगा।

माँ के आंसू, पिता की तकलीफों का,तू ये क्या सिला दे रहा है?जिसने तेरे पाँव के नीचे,कभी खुद को बिछा दिया था-2आज उन्हीं को तू, वृद्धाश्रम जाने की सज़ा दे रहा है

माँ के आंसू, पिता की तकलीफों का,
तू ये क्या सिला दे रहा है?
जिसने तेरे पाँव के नीचे,
कभी खुद को बिछा दिया था-2
आज उन्हीं को तू, वृद्धाश्रम जाने की सज़ा दे रहा है

माँ बाप के बेशुमार अहसानों का, बदला तू क्या चुकाएगा?आज जैसा करके तू खुश हो रहा है नादान?कल वैसा ही सिला, कुदरत से तू पाएगा।

माँ बाप के बेशुमार अहसानों का, बदला तू क्या चुकाएगा?आज जैसा करके तू खुश हो रहा है नादान?कल वैसा ही सिला, कुदरत से तू पाएगा।

शाखों से टूटकर जैसे पत्ते अलग हो जाते हैं।कुछ लोग बिछड़कर भीड़ में,जाने कहां खो जाते हैं।हो जाते हैं वो बेशक आंखों से ओझल,मगर दिल के किसी कोने में,उम्र भर के लिए दस्तक छोड़ जाते हैं।........Surendra Kumar........

शाखों से टूटकर जैसे पत्ते अलग हो जाते हैं।
कुछ लोग बिछड़कर भीड़ में,जाने कहां खो जाते हैं।
हो जाते हैं वो बेशक आंखों से ओझल,
मगर दिल के किसी कोने में,
उम्र भर के लिए दस्तक छोड़ जाते हैं।

........Surendra Kumar........

गुरुवार, 2 मार्च 2023

आपके दो लफ्ज़ किसी का हौंसला बढ़ा सकते हैं। यही हबीब और रकीब बना सकते हैं। दो लफ्ज़ मुहब्बत के बोलने में कंजूसी कैसी?-2 ये लफ्ज़ बिगड़ी हुई हर बात बना सकते हैं।

आपके दो लफ्ज़ किसी का हौंसला बढ़ा सकते हैं।
 यही हबीब और रकीब बना सकते हैं।
 दो लफ्ज़ मुहब्बत के बोलने में कंजूसी कैसी?-2
 ये लफ्ज़ बिगड़ी हुई हर बात बना सकते हैं।
 

बुधवार, 1 मार्च 2023

तूफानी इरादों को कौन रोक पाया है।जिसने खोया है खुद को,उसी ने जिंदगी को पाया है।

जिंदगी की मुश्किलें ही हमें,हमसे मिलवाती हैं।
कौन अपना है ,कौन बेगाना, यह हमें समझाती हैं।


जिंदगी की मुश्किलें ही हमें,हमसे मिलवाती हैं।कौन अपना है ,कौन बेगाना, यह हमें समझाती हैं।

जिंदगी की मुश्किलें ही हमें,
जिंदगी का मतलब समझाती हैं।
फ़र्क अपने और बेगानों में,
करना सिखलाती हैं।