JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

शनिवार, 4 मार्च 2023

शाखों से टूटकर जैसे पत्ते अलग हो जाते हैं।कुछ लोग बिछड़कर भीड़ में,जाने कहां खो जाते हैं।हो जाते हैं वो बेशक आंखों से ओझल,मगर दिल के किसी कोने में,उम्र भर के लिए दस्तक छोड़ जाते हैं।........Surendra Kumar........

शाखों से टूटकर जैसे पत्ते अलग हो जाते हैं।
कुछ लोग बिछड़कर भीड़ में,जाने कहां खो जाते हैं।
हो जाते हैं वो बेशक आंखों से ओझल,
मगर दिल के किसी कोने में,
उम्र भर के लिए दस्तक छोड़ जाते हैं।

........Surendra Kumar........

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