JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

बुधवार, 16 मार्च 2011

यूं तो मिलते हैं ज़माने में

यूं तो मिलते हैं, ज़माने में यूं,मिलने वाले।
नहीं मिलते, दिल ए जज़्बात समझने वाले।

जो तेरे पास ये दौलत है तो ये दुनिया है।
नहीं दौलत तो लें, मुंह फेर ये मिलने वाले।
यूं तो मिलते हैं.......

नहीं मरहम तेरे जख्मों पे लगाए कोई।
मिलेंगे लाख तेरे हाल पे हँसने वाले।
यूं तो मिलते हैं, ज़माने में .....

तेरे जीवन में तेरा साथ न देगा कोई।
आएंगे लाख तेरी लाश पे रोने वाले।

यूं तो मिलते हैं ज़माने में यूं मिलने वाले।
नहीं मिलते दिल ए जज़्बात समझने वाले।

          ............. ग़ज़ल  :  सुरेन्द्र कुमार 

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