JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

मंगलवार, 29 मार्च 2011

तेरे दरस की प्यासी आंखें...

तेरे दरस की प्यासी आँखें ,हे शिव शम्भू भोलेनाथ -२
अब तो दरसन दे दो मुझको हे त्रिपुरारि दीनानाथ .
तेरे दरस की प्यासी ऑंखें .....................
ॐ नमः शिवाय -२

न मैं चाहूँ हीरे मोती , और न चाहूँ  ऊँची शान 
हमको दे दो हे शिव शंकर , अपने चरणों में स्थान -२
सारी दुनिया के रखवाले ,तुम हो सरे जग के नाथ 
तेरे दरस की प्यासी आँखें ..................
ॐ  नमः शिवाय -२

जो करते हैं तेरा पूजन ,वो नर हर सुख पाते हैं -२
जो जपते हैं जय शिव हर क्षण , भाव सागर तर जाते हैं -२
तन- मन-धन सब वारा तुम पर मान लिया तुम्हे जीवन नाथ .
तेरे दरस की प्यासी ऑंखें हे शिव शम्भू भोलेनाथ 
अब तो दरसन दे दो मुझको हे त्रिपुरारि दीनानाथ 
तेरे दरस की प्यासी ऑंखें ......................  


                                                 गीत : सुरेन्द्र कुमार  

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