JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

सोमवार, 14 मार्च 2011

दिल को तेरे सिवा कोई भाता नहीं।

दिल को तेरे सिवा कोई भाता नहीं।
चैन तेरे सिवा मुझको आता नहीं।  

तू है मेरा खुदा, तू मेरी जिंदगी।
तू इबादत मेरी, तू मेरी बंदगी। 
हर तरफ तू ही तू, ऐ मेरे हमनशी। 
और कुछ भी नजर,मुझको आता नहीं।

मेरी हर सांस तू,मेरा अहसास तू।
मेरा आगाज़ तू,मेरा अंजाम तू।
कबसे रहती है तू,मेरी धड़कन में भी।






कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें