हम आस लगाए बैठे हैं, वो कब कूचे में आएंगे।
वीरान पड़ा गुलशन मेरा, आकर वो इसे महकाएंगे।
हीरों की चमक है आंखों में, फूलों की महक हैं सांसों में।
चलती वो नदी सी बलखाती, चांदी की खनक बातों में,
ये चांद सितारे भी उनको, जब देखेंगे शरमाएंगे।
हम आस लगाए बैठे हैं।
वो कब कूचे में आएंगे।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें