JAGJIT SINGH

  • GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR

शनिवार, 8 मार्च 2025

सहरा कभी गुलज़ार नहीं होगा

हर बार यही सोचा,
अब नहीं होगा।
जो हुआ इस बार,
इस बार नहीं होगा।
किसी से उम्मीद रखना,
अच्छा नहीं होता।
पतझड़ का मौसम,
कभी बहार नहीं होगा।
सहरा में दूर तलक,
पानी का कतरा नज़र नहीं आता।
कितना भी बरस जाए यहां सावन,
सहरा कभी गुल -ए -गुलज़ार नहीं होगा।

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