मेरे गीत, मेरी ग़ज़लें
JAGJIT SINGH
GHAZALS, JAVED AKHTAR , GULZAR
सोमवार, 17 मार्च 2025
तबस्सुम
तमन्ना यही है कि,
हर लब पर तबस्सुम हो।
न कोई तन्हा हो,
न कोई गुमसुम हो।
सिर्फ हम ही हम हो हर तरफ़।
न कोई मैं हो, न कोई तुम हो।
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